वलगढ़ में स्कूल की छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने वाले प्रिंसिपल की ग्रामीणों ने की जमकर धुनाई

वलगढ़ में स्कूल की छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने वाले प्रिंसिपल की ग्रामीणों ने की जमकर धुनाई

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र और खासकर सीकर व झुंझुनूं जिले के शैक्षणिक माहौल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल की घिनौनी करतूत का पर्दाफाश हुआ. झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ (Navalgarh) इलाके से एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक स्कूल के प्रिंसिपल पर अपनी ही स्कूल की एक मासूम नाबालिग छात्रा के साथ लगातार छेड़छाड़ करने और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगा है. आरोपी प्रिंसिपल क्लासरूम या ऑफिस में बहाने से छात्रा को बुलाकर उस पर अवैध दबाव बनाता था और कथित तौर पर फोन पर बात करने के लिए कहता था. इस घिनौनी हरकत से आहत और डरी हुई नाबालिग छात्रा ने जब किसी तरह हिम्मत जुटाकर घर पहुंच कर अपनी मां और परिजनों को रो-रोकर पूरी आपबीती सुनाई, तो परिवार वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई. गुस्से से आगबबूला हुए परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर न केवल आरोपी प्रिंसिपल की जमकर धुनाई की, बल्कि उसे पुलिस के हवाले भी कर दिया. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है और शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाले इस प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है.

कैसे शुरू हुई थी प्रिंसिपल की यह घिनौनी हरकत और क्या थी पूरी वारदात?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित नाबालिग छात्रा नवलगढ़ क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही थी. स्कूल का प्रिंसिपल अपनी हवस और पद की धौंस का इस्तेमाल करते हुए पिछले कुछ दिनों से लगातार उस मासूम बच्ची को अलग-अलग बहानों से अपने पास बुलाता था. वह छात्रा पर अनुचित दबाव बनाता था और उससे निजी बातचीत करने तथा फोन पर संपर्क में रहने के लिए कहता था. शुरुआत में उस डरी-सहमी बच्ची ने डर के मारे यह बात किसी को नहीं बताई, क्योंकि प्रिंसिपल ने उसे स्कूल से नाम काट देने या परीक्षा में फेल कर देने की धमकी दे रखी थी. लेकिन जब उस दरिंदे की हरकतें दिन-प्रतिदिन बढ़ती गईं और मानसिक प्रताड़ना असहनीय हो गई, तो उस छात्रा ने स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकलकर अपने घर पर परिजनों को अपनी टूटी-फूटी जुबान में पूरी कहानी बयां कर दी. एक बेटी की आंखों में आंसू और उसकी डमी हुई हालत देखकर परिवार के लोगों का खून खौल उठा और उन्होंने तुरंत इस मामले में कड़ा कदम उठाने का फैसला किया.

आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों का फूटा गुस्सा, स्कूल पहुंचकर की आरोपी की जमकर धुनाई

जैसे ही परिजनों और मोहल्ले के लोगों को इस शर्मनाक घटना की जानकारी मिली, वे तुरंत एकजुट होकर उस स्कूल में जा पहुंचे. गुस्से से तमतमाए ग्रामीणों ने जब आरोपी प्रिंसिपल को आमने-सामने घेरा, तो वह पहले तो अपनी सफाई में बहाने बनाने लगा और आरोपों से मुकरने की कोशिश करने लगा. हालांकि, लोगों का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर था कि उन्होंने बिना देर किए आरोपी प्रिंसिपल की जमकर खातिरदारी कर दी और उसकी जबरदस्त धुनाई कर डाली. स्कूल परिसर में इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और भीड़ के चंगुल से प्रिंसिपल को सुरक्षित बाहर निकाला. पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत आरोपी को अपनी हिरासत में ले लिया और थाने ले आई, ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रण में बनी रहे. इस दौरान स्कूल के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी और हर कोई इस घिनौनी हरकत की कड़ी निंदा कर रहा था.

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया

घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है और पीड़ित नाबालिग छात्रा के परिजनों की शिकायत पर आरोपी प्रिंसिपल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सख्त 'पॉक्सो एक्ट' (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और निष्पक्ष तथा त्वरित जांच सुनिश्चित की जाएगी. पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाने के साथ-साथ उसके बयान भी दर्ज कर लिए हैं, और अदालत के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. इस प्रकार के मामलों में जिस तरह से समाज और पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया है, उससे यह संदेश स्पष्ट हो गया है कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

शिक्षा के मंदिरों में सुरक्षा और बाल अधिकारों को लेकर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस सनसनीखेज घटना ने एक बार फिर से देश भर के शिक्षण संस्थानों, स्कूलों और खासकर निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. माता-पिता अपने कलेजे के टुकड़ों को सुबह यह सोचकर स्कूल भेजते हैं कि वे वहां सुरक्षित माहौल में विद्या प्राप्त करेंगे, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो समाज का विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है. शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि हर स्कूल में आंतरिक शिकायत समितियां (Internal Complaints Committees) सक्रिय हों और समय-समय पर स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जाए ताकि किसी भी असामाजिक तत्व या चरित्रहीन शिक्षक को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का मौका न मिल सके. नवलगढ़ की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि जब तक समाज खुद जागरूक होकर ऐसे अपराधियों के खिलाफ मुखर नहीं होता, तब तक बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं की जा सकती.