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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय थाली में 'दही' को एक संपूर्ण आहार माना जाता है। प्रोबायोटिक्स और कैल्शियम से भरपूर दही पाचन के लिए वरदान है, लेकिन अक्सर बड़े-बुजुर्ग रात के समय दही खाने से मना करते हैं। क्या यह केवल एक पुरानी मान्यता है या इसके पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक कारण है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही का सेवन आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि डिनर में दही शामिल करने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं और यह किन बीमारियों को न्योता दे सकता है।

कफ और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा

आयुर्वेद के अनुसार, दही की तासीर 'अभिष्यंदी' होती है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर की रक्त वाहिकाओं और सूक्ष्म छिद्रों में रुकावट पैदा कर सकता है। रात के समय दही खाने से शरीर में 'कफ' दोष बढ़ जाता है। इससे खांसी, जुकाम, गले में खराश और फेफड़ों में जमाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा या साइनस की शिकायत है, उनके लिए रात में दही खाना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

धीमा मेटाबॉलिज्म और पाचन में भारीपन

दही प्रकृति में भारी और पचने में समय लेने वाला आहार है। सूर्यास्त के बाद हमारी शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं और मेटाबॉलिज्म (चयापचय) की गति भी धीमी पड़ जाती है। ऐसे में रात को दही खाने से पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग (सूजन) महसूस हो सकती है। यदि आप वजन कम करने की प्रक्रिया में हैं, तो रात में दही का सेवन आपके कैलोरी काउंट को बढ़ा सकता है, क्योंकि इसमें फैट और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।

यूरिक एसिड और जोड़ों के दर्द में बढ़ोत्तरी

जिन लोगों को हाई यूरिक एसिड या जोड़ों में दर्द की समस्या है, उनके लिए रात में दही का सेवन किसी जहर से कम नहीं है। दही में मौजूद प्रोटीन और खट्टापन यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है, जिससे जोड़ों में सूजन और असहनीय दर्द शुरू हो सकता है। गठिया (Arthritis) के मरीजों को खास तौर पर रात के भोजन में दही से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

दही खाने का सबसे सही समय क्या है?

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, दही खाने का सबसे उत्तम समय सुबह का नाश्ता या दोपहर का भोजन (Lunch) है। दिन की रोशनी में हमारा पाचन तंत्र सक्रिय होता है, जिससे दही के प्रोबायोटिक्स आसानी से पच जाते हैं और शरीर को ऊर्जा देते हैं। यदि आप रात में डेयरी उत्पाद लेना ही चाहते हैं, तो दही के स्थान पर 'छाछ' (बिना नमक या चीनी के) या गुनगुना दूध लेना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।