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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : राजधानी के अर्बन कोआपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपये के ऋण घोटाले की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। बैंक की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े हस्तक्षेप के बाद अब वर्तमान प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाया है। बैंक के पूर्व प्रबंधक संजय गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। वहीं, आबकारी विभाग को दी गई 8 करोड़ की संदिग्ध बैंक गारंटी ने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

24 जेसीबी मशीनों का 'अदृश्य' खेल, करोड़ों का चूना

यह पूरा मामला मुख्य रूप से वर्ष 2013-14 के दौरान 'बैक हो लोडर' (जेसीबी मशीन) के लिए दिए गए ऋणों से जुड़ा है। बैंक सचिव बीरबल के अनुसार, उस समय के तत्कालीन सचिव आरके बंसल और प्रबंधक संजय गुप्ता ने नियमों को ताक पर रखकर 24 व्यक्तियों को ऋण बांटे थे। घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऋण देने के बावजूद बैंक के रिकॉर्ड में आवश्यक एंट्रियां ही नहीं की गईं। पूर्व की जांच में दोनों अधिकारियों को दोषी पाया जा चुका है। वर्तमान में तत्कालीन सचिव की मृत्यु हो चुकी है, जिसके चलते अब उनके बेटे को वसूली प्रक्रिया में पक्षकार बनाया जा रहा है।

आबकारी विभाग की 8 करोड़ की 'गारंटी' पर मंडराया संकट

इस घोटाले की आंच अब उत्तराखंड आबकारी विभाग तक भी पहुंच गई है। एक शराब कारोबारी ने विभाग के पास राजस्व सुरक्षा के तौर पर अर्बन कोआपरेटिव बैंक की 8 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा की थी। चर्चा है कि यह गारंटी मात्र 5 करोड़ की एफडी (FD) के आधार पर जारी कर दी गई, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

जब जिला आबकारी अधिकारी वीरेंद्र जोशी और उनकी टीम बैंक गारंटी की सत्यता जांचने बैंक पहुंची, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आबकारी विभाग अब बैंक को नोटिस जारी करने की योजना बना रहा है, क्योंकि यदि यह गारंटी फर्जी निकली तो सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो सकता है।

खाताधारकों का गुस्सा: चेयरमैन और सचिव की अनदेखी का आरोप

बैंक की डूबती साख के बीच हजारों खाताधारक अपनी जमा पूंजी को लेकर चिंतित हैं। खाताधारकों का सीधा आरोप है कि बैंक के चेयरमैन और सचिव की मिलीभगत या अनदेखी के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं था। हालांकि, मौजूदा चेयरमैन मयंक ममगाईं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सारा ठीकरा पूर्ववर्ती प्रबंधन पर फोड़ दिया है।

अब देखना यह होगा कि संजय गुप्ता पर मुकदमा दर्ज होने के बाद क्या बैंक की डूबी हुई रकम वापस आ पाएगी या खाताधारकों को अपनी गाढ़ी कमाई के लिए और लंबा इंतजार करना होगा।