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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गया है। ईरान ने सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी 'अरामको' (Aramco) के रास तानूरा संयंत्र पर ड्रोन हमला कर पूरी दुनिया को हिला दिया है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच किए गए इस हमले के बाद सुरक्षा कारणों से रिफाइनरी का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ना तय है।

रास तानूरा संयंत्र ठप: वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल

सऊदी अरब की सरकारी कंपनी अरामको का रास तानूरा केंद्र प्रतिदिन 550,000 बैरल कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता रखता है।

हमले का विवरण: सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दुश्मन देश के मानवरहित विमानों (Drones) ने मुख्यालय को निशाना बनाया। हालांकि सुरक्षा बलों ने दो ड्रोन हवा में मार गिराए, लेकिन एक ड्रोन के गिरने से परिसर में आग लग गई।

अस्थायी बंदी: एहतियात के तौर पर लोडिंग प्रक्रिया और रिफाइनिंग का काम रोक दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।

80 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, भारत पर पड़ेगा बोझ

इस हमले की खबर फैलते ही वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है।

ब्रेंट क्रूड में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें: यदि सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। यह हमला 2019 के उन हमलों की याद दिलाता है जब सऊदी अरब का आधा तेल उत्पादन ठप हो गया था।

ईरान की नई रणनीति: खाड़ी देशों के हवाई अड्डों पर भी खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब न केवल सऊदी अरब बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ओमान जैसे पड़ोसी देशों के बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहा है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने इसे एक 'आतंकवादी हमला' करार दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि अगले चार हफ्तों में यह सैन्य संघर्ष और अधिक तीव्र हो सकता है।

रिफाइनरी की सुरक्षा और भविष्य की चुनौती

सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि उसे अपनी राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। फिलहाल अरामको के इंजीनियर नुकसान का आकलन कर रहे हैं। फारस की खाड़ी के तट पर स्थित यह संयंत्र सऊदी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है, और इसका लंबे समय तक बंद रहना वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे सकता है।