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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण महायुद्ध ने अब 'इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर' (Electronic Warfare) का रूप ले लिया है। खाड़ी देशों (Gulf Countries) और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज की खाड़ी' (Strait of Hormuz) में बड़े पैमाने पर GPS जैमिंग और स्पूफिंग की खबरें सामने आ रही हैं। इस अदृश्य हमले के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार का पहिया थमने लगा है। दर्जनों विशाल तेल टैंकर और मालवाहक जहाज समुद्र के बीचों-बीच अपनी दिशा भटक रहे हैं, जिससे भारत सहित दुनिया भर की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

जहाजों के नेविगेशन सिस्टम हुए 'अंधे', रडार पर गलत लोकेशन

समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे जहाजों के जीपीएस (Global Positioning System) सिग्नल अचानक गायब हो रहे हैं या फिर उन्हें गलत लोकेशन दिखाई जा रही है। इसे तकनीकी भाषा में 'स्पूफिंग' कहा जाता है, जिसमें जहाज का नेविगेशन सिस्टम यह दिखाता है कि वह सुरक्षित पानी में है, जबकि असलियत में वह युद्धग्रस्त क्षेत्र या दुश्मन की समुद्री सीमा के करीब होता है। इस खतरे के कारण कैप्टन और नाविक अब आधुनिक मशीनों के बजाय पुराने 'मैनुअल' तरीकों से जहाज चलाने को मजबूर हैं, जो बेहद जोखिम भरा है।

[Image showing GPS interference zones in the Persian Gulf and Strait of Hormuz]

भारत के 'ऑपरेशन संकल्प' और 'ऑपरेशन डेजर्ट स्ट्राइक' पर असर

खाड़ी क्षेत्र में भारतीय हितों और जहाजों की सुरक्षा के लिए तैनात भारतीय नौसेना के 'ऑपरेशन संकल्प' (Operation Sankalp) के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारतीय युद्धपोत जो खाड़ी में मर्चेंट जहाजों को एस्कॉर्ट कर रहे हैं, उन्हें भी इन सिग्नल व्यवधानों का सामना करना पड़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इजरायली और अमेरिकी ड्रोन्स को गुमराह करने के लिए अपनी सीमाओं पर शक्तिशाली जैमर्स लगाए हैं, लेकिन इनका खामियाजा निर्दोष व्यापारिक जहाजों को भुगतना पड़ रहा है।

क्या 'होर्मुज की खाड़ी' पूरी तरह बंद हो जाएगी?

होर्मुज की खाड़ी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोक पॉइंट' है, जहाँ से दुनिया का 20% और भारत का करीब 40% कच्चा तेल गुजरता है। जीपीएस जैमिंग के कारण जहाजों के आपस में टकराने या अनजाने में प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने का डर बढ़ गया है। कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रूट पर अपने जहाजों को भेजने से मना कर दिया है। यदि यह व्यवधान जारी रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं।

सैटेलाइट वॉरफेयर और सुपरपावर्स की भूमिका

अमेरिकी खुफिया विभाग का मानना है कि इस जैमिंग के पीछे केवल ईरान ही नहीं, बल्कि उसे तकनीकी सहायता दे रहे अन्य देशों का भी हाथ हो सकता है। दूसरी ओर, इजरायल ने भी अपनी सीमाओं के पास जीपीएस सिग्नल्स को ब्लॉक कर दिया है ताकि ईरान की 'फतेह' जैसी सटीक मिसाइलें अपने लक्ष्य से भटक जाएं। इस 'सिग्नल युद्ध' ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युग की लड़ाई केवल मिसाइलों से नहीं, बल्कि डेटा और सिग्नल्स के जरिए भी लड़ी जा रही है।