Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा प्रखंड में फसलों के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके नीलगायों (स्थानीय भाषा में घोड़परास) के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा 'शूट-आउट' अभियान चलाया है। गुरुवार की सुबह रामपुर पंचायत के खेतों में हलचल तब बढ़ गई जब बंदूक की आवाजों से पूरा इलाका गूंज उठा। इस विशेष अभियान के तहत फसलों को बर्बाद कर रहे करीब 50 घोड़परास को मार गिराया गया है।
हैदराबाद के मशहूर शूटर ने संभाली कमान
किसानों की लगातार शिकायतों और भारी आर्थिक नुकसान को देखते हुए सरकार और जिलाधिकारी की पहल पर यह कदम उठाया गया। इस खतरनाक ऑपरेशन के लिए विशेष रूप से हैदराबाद से मशहूर शूटर शफात अली खान को बुलाया गया था।
ऑपरेशन का समय: गुरुवार सुबह से शुरू होकर दोपहर तक।
रणनीति: शूटर शफात अली खान ने अपनी टीम के साथ खेतों के बीच जाकर झुंड में रहने वाले इन जानवरों को निशाना बनाया।
सुरक्षा: फायरिंग के दौरान किसी ग्रामीण को चोट न लगे, इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने घेराबंदी की थी और लोगों को खेतों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई थी।
फसलों की बर्बादी से बेहाल थे किसान
रामपुर पंचायत के मुखिया अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पिछले काफी समय से घोड़परास का आतंक इतना बढ़ गया था कि किसानों की रातों की नींद उड़ गई थी। ये जानवर रात के अंधेरे में खेतों में घुसकर तैयार फसलों को न केवल खाते थे, बल्कि उन्हें पैरों तले रौंदकर पूरी तरह बर्बाद कर देते थे। कई किसान कर्ज के बोझ तले दब रहे थे क्योंकि उनकी पूरी मेहनत पर ये जानवर पानी फेर देते थे।
जेसीबी से खोदे गए गड्ढे, प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया
अभियान के दौरान मारे गए घोड़परास को स्वास्थ्य और स्वच्छता के नियमों का पालन करते हुए निपटाया गया।
मैदानी निपटान: मारे गए जानवरों को खेतों में ही जेसीबी मशीन की मदद से गहरा गड्ढा खोदकर दफनाया गया।
निगरानी: पूरी दफनाने की प्रक्रिया प्रशासन की सीधी देखरेख में हुई ताकि इलाके में संक्रमण या बदबू की कोई समस्या पैदा न हो।
ग्रामीणों की उमड़ी भीड़: उत्साह और डर का माहौल
बंदूक की आवाजें सुनते ही आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इस नजारे को देखने के लिए खेतों की ओर दौड़ पड़े। भीड़ इतनी बढ़ गई कि शूटर को खुद माइक संभालकर लोगों को पीछे हटने की चेतावनी देनी पड़ी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिस बल ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया।




