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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ता अंततः संपन्न हो गई है। इस ऐतिहासिक समझौते को 'व्यापारिक समझौतों की जननी' कहा जा रहा है क्योंकि यह वैश्विक जीडीपी के लगभग 25 प्रतिशत और लगभग 2 अरब उपभोक्ताओं वाले विशाल बाजार को जोड़ता है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार (26 जनवरी, 2026) को इस बहुप्रतीक्षित समझौते की पुष्टि की, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को इसकी घोषणा की। यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पहली बार 2013 में शुरू हुई थी, लेकिन कई मतभेदों के कारण रुक गई। जून 2022 में बातचीत फिर से शुरू हुई और अब लगभग नौ साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार समझौता हो गया है। यह समझौता इसलिए भी खास है क्योंकि इससे भारत को 27 यूरोपीय देशों के बाजारों में सीधा और आसान व्यापार प्रवेश मिलेगा। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।

2023-24 वित्तीय वर्ष में यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। इस अवधि के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच कुल व्यापार 135 अरब डॉलर तक पहुंच गया। नए मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद इस व्यापार में तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है।

97 प्रतिशत से अधिक भारतीय उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुंच।

इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को सबसे अधिक लाभ होगा। रिपोर्टों के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू होने के बाद, 97 प्रतिशत से अधिक भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त या बहुत कम शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। कपड़ा, चमड़ा, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ होगा। इसके अलावा, बांग्लादेश जैसे देशों को दिए गए विशेष शुल्क-मुक्त लाभों को समाप्त करने से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी।

ट्रम्प की टैरिफ नीति के विरुद्ध रणनीतिक संतुलन

भारत-यूरोपीय संघ का यह मुक्त व्यापार समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीतियों ने वैश्विक व्यापार में अस्थिरता बढ़ा दी है। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया है और रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत का जुर्माना लगाया है। यूरोपीय संघ भी अमेरिकी इस्पात और एल्युमीनियम टैरिफ से प्रभावित हुआ है। परिणामस्वरूप, भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते को ट्रम्प की टैरिफ नीति के रणनीतिक प्रतिसंतुलन के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा - यह सिर्फ व्यापार नहीं, साझेदारी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को महज़ एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि साझा मूल्यों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह समझौता वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा दर्शाता है, और साथ ही लोकतंत्र, कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत करता है।