जमशेदपुर : देखते ही देखते जलकर खाक हुईं दर्जनों दुकानें

जमशेदपुर : देखते ही देखते जलकर खाक हुईं दर्जनों दुकानें

झारखंड के औद्योगिक और व्यस्त शहर जमशेदपुर से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और दहला देने वाली दुर्घटना सामने आ रही है। शहर के एक प्रमुख और घनी आबादी वाले इलाके में स्थित मुख्य सब्जी मंडी में बीती रात अचानक आग लग गई, जिसने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसमान में कई फीट ऊपर तक काले धुएं का गुबार छा गया और पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया। इस भीषण अग्निकांड में सब्जी की दर्जनों दुकानें, लकड़ी के कैरेट, तराजू और व्यापारियों की महीनों की मेहनत जलकर पूरी तरह खाक हो गई। गनीमत यह रही कि घटना रात के वक्त हुई, जिससे किसी बड़े जननुकसान की खबर नहीं है, लेकिन दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। आइए एक ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि जमशेदपुर की इस सब्जी मंडी में हुए इस भीषण हादसे की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है।

अचानक उठी आग की लपटें और देखते ही देखते तांडव में बदली स्थिति

घटना के चश्मदीदों और स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, जब यह हादसा हुआ तब बाजार बंद हो चुका था और कुछ ही लोग आसपास मौजूद थे। अचानक मंडी के एक कोने से धुएं का गुबार उठते देखा गया, जब तक लोग कुछ समझ पाते और आग पर काबू पाने की कोशिश करते, तब तक तेज हवाओं के झोंके के कारण आग ने आसपास की अन्य दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। बांस, लकड़ियों और प्लास्टिक की कैरेट से बनी अस्थायी दुकानें होने के कारण आग ने जंगल की आग की तरह तेजी से फैलना शुरू कर दिया। देखते ही देखते आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं, जिन्हें देखकर आसपास के रिहायशी इलाकों के लोग भी अपने घरों से बाहर निकल आए। आग की भयावहता को देखकर पूरे बाजार में चीख-पुकार और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

दमकल विभाग की कड़ी मशक्कत: घंटों की लड़ाई के बाद आग पर पाया गया काबू

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड (दमकल विभाग) की गाड़ियां तुरंत हरकत में आ गईं। जमशेदपुर के विभिन्न फायर स्टेशनों से एक के बाद एक कई दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का काम शुरू किया। हालांकि, मंडी की तंग गलियां और दुकानों की घनी बनावट होने के कारण दमकल कर्मियों को आग के मुख्य केंद्र तक पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा। लगभग दो से तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और पानी की बौछार करने के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह काबू पाया। यदि फायर ब्रिगेड की टीम थोड़ी और देर से पहुंचती, तो आग पास के अन्य व्यावसायिक परिसरों और मकानों तक भी फैल सकती थी, जिससे नुकसान और भी ज्यादा भयानक हो सकता था।

लाखों का नुकसान और दुकानदारों के अरमान हुए राख: रोजी-रोटी का संकट

इस भीषण अग्निकांड में सबसे ज्यादा दर्दनाक पहलू स्थानीय गरीब और छोटे सब्जी विक्रेताओं का है, जिनकी पूरी पूंजी एक ही रात में राख के ढेर में बदल गई। दुकानदारों ने बताया कि वे हर रोज शाम को अपनी दुकानें बंद करके जाते हैं और सुबह तड़के आकर व्यापार शुरू करते हैं। इस आग में न केवल उनकी दुकानें जली हैं, बल्कि थोक में रखा गया करोड़ों रुपये का ताजा माल, सब्जियां, इलेक्ट्रॉनिक कांटे और नकदी भी जलकर स्वाहा हो गई है। कई छोटे दुकानदारों ने साहूकारों या बैंकों से कर्ज लेकर अपना कारोबार शुरू किया था, और इस दुर्घटना ने उन्हें सड़क पर ला खड़ा किया है। पीड़ित दुकानदारों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं।

शॉर्ट सर्किट या साजिश? आग लगने के कारणों की तकनीकी जांच शुरू

प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) बताया जा रहा है, क्योंकि बाजार में बिजली के तारों का जाल बिखरा हुआ था। हालांकि, स्थानीय व्यापारी संघ और लोग इस बात की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं कि कहीं यह किसी शरारती तत्व की करतूत या सोची-समझी साजिश तो नहीं थी। पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल से नमूने एकत्र कर लिए हैं और मामले की हर पहलू से गहनता से जांच की जा रही है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर शहर के बाजारों में फायर सेफ्टी और सुरक्षा मानकों की पोल खोलकर रख दी है, जिस पर अब कड़े कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।