JJM Scam: अब जेल से बाहर आएंगे महेश जोशी, सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

JJM Scam: अब जेल से बाहर आएंगे महेश जोशी, सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी, सनसनीखेज और राजनीतिक हलचल पैदा करने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के बहुचर्चित और करोड़ों रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के मामले में लंबे समय से कानूनी शिकंजे में फंसे राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश जोशी (Mahesh Joshi) को देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिल गई है। पिछले लगभग डेढ़ साल से जेल की सलाखों के पीछे या कानूनी दांव-पेच के बीच संघर्ष कर रहे महेश जोशी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका मजबूती से रखी, जिसके बाद अदालत ने उन्हें राहत प्रदान करते हुए जमानत मंजूर कर ली है। इस बड़े फैसले के बाद अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। आइए एक इन्वेस्टिगेटिव और पॉलिटिकल रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले का पूरा मामला क्या है और सुप्रीम कोर्ट से इस राहत के मिलने के बाद राजस्थान की सियासत पर इसका क्या असर पड़ने वाला है।

क्या है बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला और क्यों घिरे थे महेश जोशी?

जल जीवन मिशन (JJM) केंद्र और राज्य सरकारों की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर तक नल से साफ पेयजल पहुंचाना है। लेकिन राजस्थान में इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी प्रमाण पत्रों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी और करोड़ों रुपये के घपले का पर्दाफाश किया था। उस वक्त राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी और महेश जोशी जलदाय विभाग (PHD) के कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस पूरे टेंडर सिंडिकेट और वित्तीय गड़बड़ियों के तार सीधे तौर पर उच्च प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर तक जुड़े हुए थे, जिसके बाद से ही महेश जोशी पर कानूनी शिकंजा कसता चला गया था।

डेढ़ साल का कड़ा कानूनी संघर्ष और निचली अदालतों से झटके के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख

महेश जोशी और उनके कानूनी सलाहकारों के लिए पिछले डेढ़ साल का समय बेहद तनावपूर्ण और संघर्ष भरा रहा है। गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद से ही वे लगातार अदालतों के चक्कर काट रहे थे। निचली अदालतों से लेकर राजस्थान हाईकोर्ट तक में उनकी जमानत याचिकाओं को विभिन्न कानूनी बिंदुओं और जांच के प्रभावित होने की आशंका का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उनके वकीलों ने हार न मानते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट में चली लंबी और मैराथन सुनवाई के दौरान उनके स्वास्थ्य, उम्र और इस मामले में अन्य सह-आरोपियों की जमानत के आधार पर तर्क दिए गए, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने आखिरकार उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें जमानत दे दी।

जेल से बाहर आने के बाद राजस्थान की राजनीति में मचेगी हलचल, कांग्रेस पर क्या होगा असर?

महेश जोशी जैसे कद्दावर और अनुभवी नेता के जेल से बाहर आने से राजस्थान की राजनीतिक आबोहवा में एक बार फिर से गर्माहट आने की पूरी उम्मीद है। जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके जोशी का राजनीतिक रसूख और पार्टी के भीतर उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। हालांकि, भले ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट से कानूनी मामलों में बड़ी राहत मिल गई है, लेकिन अभी भी इस मामले की विस्तृत सुनवाई और ट्रायल अदालत में जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बाहर आने से विपक्षी दलों को एक बार फिर से आक्रामक होने का मौका मिलेगा, वहीं कांग्रेस पार्टी के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार मामलों में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर टिकी निगाहें

ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अभी भी इस पूरे जल जीवन मिशन घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं। इस घोटाले से जुड़े कई अन्य ठेकेदार, अधिकारी और बिचौलिए भी पहले ही जांच के दायरे में आ चुके हैं। महेश जोशी को मिली यह जमानत केवल इस मामले में एक कानूनी पड़ाव है, क्योंकि आने वाले समय में ट्रायल के दौरान उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मजबूत सबूत पेश करने होंगे। फिलहाल, डेढ़ साल के लंबे और अंधेरे दौर के बाद जेल से बाहर आने की खबर ने उनके परिवार और समर्थकों को बड़ी राहत दी है, और अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि वे आगामी दिनों में सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक गतिविधियों में किस प्रकार अपनी वापसी दर्ज कराते हैं।