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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : शहर की ऐतिहासिक पहचान और स्वाधीनता संग्राम की यादों को समेटे 'गंगा मेला' पर मंगलवार (10 मार्च 2026) को कनपुरिया होली की अनूठी मस्ती देखने को मिली। आजादी के मतवालों की रिहाई की खुशी में मनाए जाने वाले इस पर्व पर हटिया के रज्जन बाबू पार्क से पारंपरिक 'रंगों का ठेला' निकाला गया। ऊंटों, घोड़ों और ट्रैक्टर-ट्रालियों पर सवार होरियारों ने पूरे शहर को रंगों से नहला दिया।

स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी है परंपरा

हटिया गंगा मेला महोत्सव कमेटी के संरक्षक मूलचंद्र सेठ ने बताया कि यह मेला केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।

इतिहास: 1942 के आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने तिरंगा फहराने पर रोक लगा दी थी, लेकिन क्रांतिकारियों ने रज्जन बाबू पार्क में झंडा फहराकर होली खेली।

संघर्ष: अंग्रेज पुलिस ने 40 युवकों को गिरफ्तार कर लिया, जिसके विरोध में पूरे कानपुर ने चक्का जाम कर दिया। आखिरकार अंग्रेजों को झुकना पड़ा और अनुराधा नक्षत्र के दिन उन युवकों को रिहा किया गया। उसी जीत की खुशी में आज भी गंगा मेला पर होली खेली जाती है।

तिरंगे से सजा रज्जन बाबू पार्क और डीएम ने फहराया ध्वज

गंगा मेला की शुरुआत बेहद भव्य रही। रज्जन बाबू पार्क को तिरंगे गुब्बारों और केसरिया झंडों से सजाया गया था।

पुष्पांजलि: शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया।

ध्वजारोहण: डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने तिरंगा फहराया और पुलिस बैंड ने राष्ट्रगान की धुन बजाई। इस दौरान विधायक अमिताभ बाजपेई और एमएलसी सलिल विश्नोई समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

ऊंट, घोड़े और ट्रैक्टर-ट्रालियों का जुलूस

पारंपरिक रंगों का ठेला जैसे ही आगे बढ़ा, कानपुर की गलियां 'वंदे मातरम' और 'भारत माता की जय' के जयकारों से गूंज उठीं।

जुलूस का स्वरूप: इस बार जुलूस में 8 ऊंट, 6 घोड़े और 4 ट्रैक्टर-ट्रालियां शामिल थीं। ट्रैक्टरों पर रखे रंगों के बड़े-बड़े ड्रमों से होरियारे ऊंची-ऊंची छतों और छज्जों तक रंगों की धार मार रहे थे।

मटकी फोड़ प्रतियोगिता: बिरहाना रोड पर आयोजित मटकी फोड़ प्रतियोगिता में जबरदस्त उत्साह दिखा। छतों से महिलाओं और बच्चों ने होरियारों पर जमकर रंग और गुलाल बरसाया।

इन रास्तों से गुजरा 'रंगों का ठेला'

जुलूस रज्जन बाबू पार्क से शुरू होकर जनरलगंज, मनीराम बगिया, मूलगंज, टोपी बाजार होता हुआ कोतवालेश्वर मंदिर पहुंचा। यहां भगवान भोलेनाथ का अबीर-गुलाल से अभिषेक किया गया। इसके बाद जुलूस चौक सराफा, मेस्टन रोड, शिवाला, कमला टावर, बिरहाना रोड और नयागंज होते हुए वापस पार्क में संपन्न हुआ।

कानपुर की होली की खास बातें

सतरंगी आसमान: पिचकारियों और गुलाल के गुबार से पूरा आसमान रंगीन नजर आ रहा था।

पारिवारिक मिलन: छतों और आंगनों में परिवारों और पड़ोसियों ने मिलकर एक-दूसरे को रंगा।

क्रांतिकारी जज्बा: यह मेला याद दिलाता है कि कानपुर के लोगों ने रंगों के जरिए भी अंग्रेजों की गुलामी का विरोध किया था।