Prabhat Vaibhav,Digital Desk : आस्था का पावन पर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था। इस दिन व्रत, रुद्राभिषेक और निशिता काल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो मनोकामना पूर्ति के लिए अनुकूल है।
निशिता काल पूजा का समय
महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण पूजा ‘निशिता काल’ में की जाती है।
निशिता काल मुहूर्त: रात्रि 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (16 फरवरी की मध्यरात्रि)
सुबह का शुभ समय: 8:24 बजे से 12:35 बजे तक
शाम का शुभ समय: 6:10 बजे से 9:23 बजे तक
15 फरवरी 2026 का पंचांग विवरण
सूर्योदय: सुबह 7:00 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:10 बजे
तिथि: त्रयोदशी शाम 5:04 बजे तक, उसके बाद चतुर्दशी प्रारंभ
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
योग: व्यतिपात एवं सर्वार्थ सिद्धि योग
चंद्र राशि: मकर
सूर्य राशि: कुंभ
ग्रहों की स्थिति (15 फरवरी 2026)
सूर्य – कुंभ
चंद्रमा – मकर
मंगल – मकर
बुध – कुंभ
बृहस्पति – मिथुन
शुक्र – कुंभ
शनि – मीन
राहु – कुंभ
केतु – सिंह
राहुकाल और अन्य अशुभ समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
राहुकाल: शाम 4:47 से 6:11 बजे तक
यमगंड काल: दोपहर 12:35 से 1:59 बजे तक
भद्रा काल: शाम 5:04 बजे से अगले दिन सुबह 5:23 बजे तक
राशि अनुसार सावधानियां
वृषभ राशि: कार्यक्षेत्र में बदलाव लाभकारी हो सकता है। ध्यान केंद्रित रखें।
मेष राशि: स्वास्थ्य और खानपान पर ध्यान दें। बड़े फैसले सोच-समझकर लें।
पूजा का महत्व
रविवार को पड़ रही इस महाशिवरात्रि पर प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करना शुभ माना गया है। शिवलिंग पर जलाभिषेक, दूध और बिल्वपत्र अर्पित करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में संतुलन और सुख-समृद्धि लाने का मार्ग प्रशस्त करती है।




