भारत में साइबर ठगी और क्रिप्टो रैकेट पर शिकंजा
देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों, हाई-टेक वित्तीय घोटालों, अवैध क्रिप्टो करंसी रैकेट और गैर-कानूनी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक का सबसे कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. पिछले कुछ महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें विभिन्न देशों के नागरिक टूरिस्ट या बिजनेस वीजा पर भारत में आकर गुप्त रूप से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी के कॉल सेंटर चला रहे थे और भोले-भाले नागरिकों को करोड़ों का चूना लगा रहे थे. इस गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक खतरे को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने भारत में विदेशियों के प्रवेश (Entry), आव्रजन निगरानी (Immigration Monitoring), लंबी अवधि तक रुकने और उनके रहने के नियमों को बेहद सख्त बना दिया है. अब देश के भीतर विदेशी नागरिकों की हर एक गतिविधि पर अत्याधुनिक डिजिटल और एआई-बेस्ड टूल्स के जरिए नजर रखी जाएगी, और यदि कोई भी विदेशी नागरिक किसी भी प्रकार की संदिग्ध या आपराधिक गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार करने के साथ-साथ हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट (Blacklisting) कर दिया जाएगा ताकि वह भविष्य में कभी भी भारत की सीमा में प्रवेश न कर सके.
साइबर ठगी और क्रिप्टो सिंडिकेट में विदेशियों की बढ़ती संलिप्तता बनी सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी चिंता
पिछले कुछ समय में भारत की कानून-व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों की जब उच्च स्तरीय जांच की गई, तो यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इन अंतरराष्ट्रीय रैकेटों के तार कई विदेशी नागरिकों से जुड़े हुए हैं. नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु, मुंबई और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों समेत देश के कई कोनों से पुलिस ने ऐसे कई फर्जी कॉल्स सेंटर्स और क्रिप्टो ट्रेडिंग स्कैम का भंडाफोड़ किया है, जिनका संचालन विदेशी नागरिकों द्वारा गुप्त रूप से किया जा रहा था. ये शातिर अपराधी भारतीय युवाओं को मोटी सैलरी का झांसा देकर अपने साथ जोड़ते थे और फिर विदेशी सर्वर व क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अवैध रूप से कमाए गए काले धन को विदेशों में ट्रांसफर करते थे. इस तरह के संगठित अपराधों से न केवल देश की वित्तीय सुरक्षा खतरे में पड़ रही थी, बल्कि आम जनता की गाढ़ी कमाई भी पल भर में डूब रही थी. इसी बात को ध्यान में रखते हुए अब सरकार ने आव्रजन और वीजा नियमों में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है ताकि इस प्रकार के विदेशी अपराधियों की देश में एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके.
नए और कड़े आव्रजन नियम: देश में रहने वाले हर विदेशी की होगी डिजिटल और जमीनी ट्रैकिंग
गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए सुरक्षा दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब भारत आने वाले प्रत्येक विदेशी नागरिक की डिजिटल प्रोफाइलिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन को और अधिक मजबूत कर दिया गया है. होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और किराए के मकानों में रहने वाले विदेशियों की जानकारी देने वाले 'C-Form' पोर्टल को स्थानीय पुलिस थानों और जिला खुफिया इकाइयों (LIU) के साथ रियल-टाइम पर जोड़ा गया है, ताकि यदि कोई विदेशी अपने वीजा की मियाद खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से देश में रहता है, तो उसकी तुरंत पहचान की जा सके. इसके अलावा, विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे वीज़ा की शर्तों का उल्लंघन करने वाले छात्रों, पर्यटकों और व्यावसायिक यात्रियों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के तुरंत कानूनी कार्रवाई करें. यदि कोई विदेशी नागरिक वीजा नियमों को तोड़कर अनधिकृत रूप से काम करता हुआ पाया जाता है या किसी वित्तीय धोखाधड़ी में लिप्त होता है, तो उसे तत्काल हिरासत में लेकर देश से डिपोर्ट (Deport) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और उसके पासपोर्ट नंबर को परमानेंट ब्लैकलिस्ट डेटाबेस में डाल दिया जाएगा.
देश की आर्थिक सुरक्षा और साइबर स्पेस को सुरक्षित रखने के लिए सरकार का कड़ा संदेश
सरकार के इन सख्त कदमों से साफ जाहिर होता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय अपराधियों और साइबर ठगों के लिए सेफ सेफ हेवन (Safe Haven) नहीं बनने दिया जाएगा. देश के भीतर तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों ने भी अपनी तकनीक और खुफिया तंत्र को उतना ही हाई-टेक बना लिया है, जिससे किसी भी प्रकार के अवैध नेटवर्क की थाह तुरंत लगाई जा सके. आम जनता से भी यह अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध विदेशी गतिविधि या फर्जी कॉल सेंटर की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर दें, ताकि समय रहते ऐसे राष्ट्रविरोधी और आपराधिक तत्वों को दबोचा जा सके. नियमों की यह सख्ती न केवल देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेगी, बल्कि उन विदेशी नागरिकों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो भारत के उदार कानूनों का गलत फायदा उठाकर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं.