Prabhat Vaibhav,Digital Desk : हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पंचक को बेहद संवेदनशील समय माना गया है। आज यानी 17 फरवरी 2026 से पंचक की शुरुआत हो रही है। खास बात यह है कि इस बार पंचक का संयोग सूर्य ग्रहण और फाल्गुन अमावस्या के साथ बन रहा है, जिससे इसकी गंभीरता और अधिक बढ़ गई है। चूंकि इस बार पंचक मंगलवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे ज्योतिषीय गणना में 'अग्नि पंचक' कहा जाता है।
क्या होता है पंचक और क्यों है यह संवेदनशील?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा का गोचर धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में होता है, तो उस अवधि को पंचक कहा जाता है। यह समय कुल पांच दिनों का होता है। मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान किए गए अशुभ कार्यों का प्रभाव पांच गुना बढ़ जाता है, इसलिए इस काल में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
अग्नि पंचक: दुर्घटना और विवादों का खतरा
मंगलवार से शुरू होने के कारण इसे 'अग्नि पंचक' का नाम दिया गया है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस दौरान आग लगने की घटनाएं, दुर्घटनाएं, कोर्ट-कचहरी के विवाद और आपसी झगड़ों का जोखिम काफी ज्यादा रहता है। सूर्य ग्रहण के साये में शुरू होने के कारण नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रह सकता है, इसलिए इन 5 दिनों में संयम और सावधानी बहुत जरूरी है।
भूलकर भी न करें ये काम: भारी पड़ सकती है लापरवाही
अग्नि पंचक के दौरान शास्त्रों में कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है:
दक्षिण दिशा की यात्रा: पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह यम की दिशा है और इस दौरान यात्रा करने से दुर्घटना या धन हानि का खतरा रहता है।
निर्माण कार्य: घर की छत डलवाना, लेंटर डालना या निर्माण से जुड़े बड़े काम शुरू करने से बचें। माना जाता है कि पंचक में शुरू किया गया निर्माण घर में क्लेश और आर्थिक संकट ला सकता है।
मशीनरी और निवेश: अग्नि पंचक के दौरान मशीनरी से संबंधित नए काम या बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए। साथ ही, व्यापार में बड़े निवेश के लिए भी यह समय अनुकूल नहीं है।
सावधानी ही बचाव है
17 फरवरी से शुरू होकर यह पंचक अगले पांच दिनों तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान किसी भी नए और मांगलिक कार्य को टालना ही समझदारी है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सूर्य ग्रहण और पंचक का यह दुर्लभ संयोग मानसिक तनाव भी बढ़ा सकता है, इसलिए इस अवधि में गायत्री मंत्र या अपने ईष्ट देव का ध्यान करना शांतिदायक साबित होगा।




