Prabhat Vaibhav,Digital Desk : नेपाल सीमा से सटे रक्सौल हवाई अड्डा परियोजना को तेज गति देने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष पहल की है। परियोजना से प्रभावित भूमि मालिकों और हितधारकों को मुआवजा समय पर और पारदर्शी तरीके से देने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि मुआवजा भुगतान को सरल और समयबद्ध बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
निर्धारित तिथियों पर शिविर
जारी नोटिस के अनुसार 11 फरवरी को मौजा भरतमही और चिकनी के रैयतों के लिए शिविर आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 13 फरवरी को मौजा चंदुली के रैयतों के लिए भी शिविर लगेगा। दोनों दिन शिविर हवाई अड्डा परिसर स्थित पुराने एसएसबी कार्यालय में आयोजित किए जाएंगे।
सामरिक और आर्थिक महत्व
रक्सौल हवाई अड्डा न केवल बिहार बल्कि देश की सामरिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह हवाई अड्डा नेपाल के प्रमुख औद्योगिक शहर बीरगंज के नजदीक स्थित है, इसलिए इसे नेपाल के प्रवेश द्वार के रूप में भी देखा जा रहा है। हवाई अड्डा शुरू होने से भारत-नेपाल व्यापार को नई गति मिलेगी और काठमांडू जाने वाले यात्रियों के लिए यह अहम ट्रांजिट केंद्र बन सकता है।
आर्थिक और रोजगार अवसर
रक्सौल हवाई अड्डा चंपारण क्षेत्र के लिए आर्थिक वरदान साबित हो सकता है। हवाई सेवा शुरू होने से निवेश, उद्योग, कोल्ड स्टोरेज और अन्य व्यवसायिक गतिविधियों में तेजी आएगी। इसके परिणामस्वरूप सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
चिकित्सा और पर्यटन कनेक्टिविटी
गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस की सुविधा से पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के लोगों को बेहतर चिकित्सा कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही बौद्ध सर्किट से जुड़े लुंबिनी और केसरिया स्तूप जैसे पर्यटन स्थलों के कारण अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए रक्सौल हवाई अड्डा महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।




