Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाला 'रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे' (Raxaul-Haldia Expressway) फिलहाल सरकारी फाइलों और जमीनी पैमाइश के बीच उलझ गया है। मुजफ्फरपुर जिले में मापकों (Surveyors) की भारी कमी के कारण न केवल यह एक्सप्रेस-वे, बल्कि रेलवे और पुल निर्माण जैसी कई और महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं। भूमि मापी और सीमांकन का काम रुकने से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ गई है, जिससे इन प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने को लेकर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।
क्यों रुक गया एक्सप्रेस-वे का काम?
मुजफ्फरपुर जिला भू-अर्जन कार्यालय में तैनात दो मापकों को आवासीय प्रशिक्षण के लिए बोधगया भेज दिया गया है। इसके बाद कार्यालय में एक भी मापक नहीं बचा है। रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के लिए जिले के मीनापुर, औराई, गायघाट, बोचहां और बंदरा प्रखंड के 72 गांवों में भूमि अधिग्रहण होना है। बिना मापी और सीमांकन के यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है, जिससे एनएचएआई (NHAI) की इस महत्वाकांक्षी योजना को बड़ा झटका लगा है।
रेलवे और गंडक पुल परियोजनाएं भी प्रभावित
सिर्फ एक्सप्रेस-वे ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य आधारभूत संरचनाएं भी मापकों की कमी की भेंट चढ़ रही हैं:
मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी डबल रेललाइन: इस प्रोजेक्ट के लिए झपहां, अहियापुर और धरहरवा जैसे क्षेत्रों में करीब 9.51 एकड़ भूमि का अधिग्रहण होना है।
गंडक नदी पर पुल: पारू प्रखंड के फतेहाबाद में गंडक नदी पर पुल और एप्रोच रोड का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी प्रक्रिया भी मापी न होने के कारण रुकी हुई है।
अधिकारियों ने सरकार से की गुहार
परियोजनाओं में हो रही देरी को देखते हुए जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने अपर समाहर्ता को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मापकों की अनुपलब्धता के कारण एनएचएआई, रेलवे और पुल निर्माण निगम की स्वीकृत परियोजनाओं का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। विभाग से जल्द से जल्द नए मापकों की तैनाती की मांग की गई है ताकि सीमांकन का कार्य दोबारा शुरू हो सके।
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे की अहमियत
यह एक्सप्रेस-वे नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल को पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह से जोड़ेगा। यह बिहार के व्यापार और परिवहन के लिए गेम चेंजर साबित होने वाला है। मुजफ्फरपुर इस रूट का एक प्रमुख केंद्र है, जहां से यह एक्सप्रेस-वे गुजरना है। यदि भूमि अधिग्रहण में इसी तरह की देरी होती रही, तो इसकी लागत बढ़ने और प्रोजेक्ट के पिछड़ने का खतरा बढ़ जाएगा।




