Prabhat Vaibhav,Digital Desk : साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) मंगलवार शाम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। ग्रहण का मोक्ष होते ही देवभूमि उत्तराखंड समेत पूरे देश में आध्यात्मिक उल्लास देखने को मिला। सूतक काल के कारण सुबह से बंद देहरादून के प्रसिद्ध मंदिरों के कपाट शाम 6:47 बजे मंत्रोच्चार और गंगाजल से शुद्धिकरण के बाद खोल दिए गए। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार और राज्य की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद लिया।
11 घंटे के सूतक काल के बाद हुआ 'शुद्धिकरण'
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो गया था। देहरादून में मंगलवार सुबह 6:20 बजे से ही मंदिरों के पट बंद कर दिए गए थे। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू हुआ और कुल 3 घंटे 27 मिनट तक इसका प्रभाव रहा। शाम 6:47 बजे जैसे ही ग्रहण समाप्त हुआ, शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराया गया और नए वस्त्र धारण करवाकर विशेष आरती की गई।
इन प्रमुख मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
ग्रहण समाप्त होते ही राजधानी के टपकेश्वर महादेव मंदिर में श्री 108 कृष्णागिरी महाराज की देखरेख में शुद्धिकरण प्रक्रिया पूरी की गई। इसके अलावा शहर के अन्य सिद्धपीठों और मंदिरों में भी भक्तों की भारी भीड़ जुटी:
सिद्धपीठ मां डाटकाली मंदिर: माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।
श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर: सहारनपुर चौक स्थित इस मंदिर में जलाभिषेक के लिए भक्त उमड़े।
पंचमुखी हनुमान मंदिर (आराघर): यहां विशेष हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
दुर्गा मंदिर (सर्वे चौक) व श्री सनातन धर्म मंदिर (प्रेमनगर): मंदिरों में भजन-कीर्तन के साथ ग्रहण के बाद की पूजा संपन्न हुई।
भक्तों ने किया दान-पुण्य और की सुख-समृद्धि की कामना
ग्रहण काल के दौरान जहां अधिकांश लोग घरों में रहकर प्रभु सिमरन में लीन रहे, वहीं शाम को मंदिर खुलने के बाद दान-पुण्य का दौर भी शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में दीप प्रज्वलित किए और आरती में भाग लिया। श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत ने बताया कि ग्रहण के बाद शुद्धिकरण एक अनिवार्य वैदिक प्रक्रिया है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शाम की आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया और लोगों ने राज्य की खुशहाली की मंगलकामना की।




