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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : नींद को हम शरीर की थकान मिटाने और सुकून का जरिया मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोते समय आने वाले खर्राटे किसी बड़ी जानलेवा बीमारी का संकेत हो सकते हैं? हालिया शोध में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 'ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया' (Obstructive Sleep Apnea) न केवल आपकी नींद उड़ा सकता है, बल्कि यह दिल के दौरे और असमय मृत्यु के जोखिम को 71% तक बढ़ा देता है। चिकित्सा जगत में इसे एक 'साइलेंट किलर' के रूप में देखा जा रहा है, जिसे अक्सर लोग सामान्य खर्राटे समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी 2026: 29 लाख लोगों पर हुआ बड़ा शोध

वेनिस में आयोजित 'यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी 2026' में प्रस्तुत एक व्यापक अध्ययन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट और एली लिली एंड कंपनी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस शोध में लगभग 29 लाख लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि स्लीप एपनिया से पीड़ित 26% मरीजों को दिल का दौरा, स्ट्रोक या मृत्यु जैसी गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ा, जबकि स्वस्थ लोगों में यह आंकड़ा महज 17% था। यह शोध स्पष्ट करता है कि नींद के दौरान सांस रुकना सीधे तौर पर हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।

क्यों जानलेवा है स्लीप एपनिया? शरीर पर पड़ता है ये बुरा असर

स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें नींद के दौरान वायुमार्ग (Airway) बार-बार अवरुद्ध हो जाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर जाता है। जैसे ही ऑक्सीजन कम होती है, मस्तिष्क व्यक्ति को जगा देता है ताकि वह फिर से सांस ले सके। यह प्रक्रिया पूरी रात सैकड़ों बार दोहराई जा सकती है। इससे न केवल नींद की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है। इसके परिणामस्वरूप उच्च रक्तचाप (Hypertension), हृदय गति का बिगड़ना और शरीर में आंतरिक सूजन जैसी समस्याएं पैदा होती हैं, जो अंततः कार्डियक अरेस्ट का कारण बनती हैं।

मोटापा और स्लीप एपनिया: एक खतरनाक 'दुष्चक्र'

विशेषज्ञों के अनुसार, स्लीप एपनिया का सीधा संबंध बढ़ते वजन से है। अध्ययन बताते हैं कि इस बीमारी के 40% से 70% मरीज मोटापे का शिकार होते हैं। गले के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी वायुमार्ग को संकरा कर देती है, जिससे सांस लेने में रुकावट आती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति का वजन कम करना और भी कठिन हो जाता है, क्योंकि खराब नींद मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देती है। यह एक ऐसा चक्र बन जाता है जिससे बाहर निकलना बिना डॉक्टरी सलाह के संभव नहीं होता।

क्या है बचाव और उपचार? खर्राटों को न करें नजरअंदाज

अगर आपको या आपके साथी को सोते समय तेज खर्राटे आते हैं, बार-बार नींद टूटती है या दिनभर थकान महसूस होती है, तो यह स्लीप एपनिया के लक्षण हो सकते हैं। राहत की बात यह है कि समय रहते इसका उपचार संभव है। 'सीपैक' (CPAP) मशीन जैसे आधुनिक उपकरण नींद के दौरान श्वसन मार्ग को खुला रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, जीवनशैली में बदलाव, वजन पर नियंत्रण और नियमित व्यायाम से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।