Prabhat Vaibhav,Digital Desk : तपती गर्मियों में एक गिलास ठंडा गन्ने का रस (Sugarcane Juice) न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा भी देता है। लेकिन जब बात मधुमेह (Diabetes) के रोगियों की आती है, तो गन्ने के रस को लेकर हमेशा एक बहस छिड़ी रहती है। क्या इसकी प्राकृतिक मिठास शुगर लेवल को बेकाबू कर सकती है या यह सेहत के लिए वरदान है? आइए विशेषज्ञों की राय से समझते हैं पूरा गणित।
गन्ने के रस के पोषक तत्व: सिर्फ मीठा पानी नहीं!
गन्ने का रस एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर का खजाना माना जाता है। इसमें लगभग 70 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जबकि 13 से 15 प्रतिशत तक प्राकृतिक चीनी और 10 से 15 प्रतिशत फाइबर पाया जाता है। चूंकि यह रस असंसाधित (Unprocessed) होता है, इसलिए इसमें फेनोलिक्स और फ्लेवोनोइड्स जैसे तत्व भी मौजूद होते हैं, जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाने में मदद करते हैं।
डायबिटीज और ग्लाइसेमिक इंडेक्स का पेंच
मधुमेह के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है किसी खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI)। हालांकि गन्ने के रस का GI सफेद चीनी से कम होता है, लेकिन फिर भी यह 'हाई ग्लाइसेमिक' श्रेणी में ही आता है। इसमें मौजूद सुक्रोज (Sucrose) की उच्च मात्रा रक्त शर्करा के स्तर को अचानक (Spike) बढ़ा सकती है, जो मधुमेह रोगियों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
क्या मधुमेह रोगी इसे पी सकते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि आपका ब्लड शुगर लेवल पहले से ही अनियंत्रित है, तो गन्ने के रस से पूरी तरह परहेज करना ही बेहतर है। लेकिन, यदि आप मधुमेह की दवा ले रहे हैं और आपकी शुगर नियंत्रित है, तो आप कभी-कभार बेहद सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं।
सावधानी ही सुरक्षा है: डॉक्टर की सलाह जरूरी
गन्ने का रस पूरी तरह से 'शुगर-फ्री' नहीं होता, इसमें प्राकृतिक सुक्रोज होता है। इसलिए, किसी भी प्रकार के 'नेचुरल जूस' को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। आमतौर पर डॉक्टर ब्लड शुगर को संतुलित रखने के लिए मरीजों को गन्ने के रस से दूर रहने की ही सलाह देते हैं।




