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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : व्हाट्सएप और मेटा की गोपनीयता नीति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डेटा साझा करने की यह प्रक्रिया भारतीय उपयोगकर्ताओं के निजता अधिकारों का उल्लंघन करती है। हालांकि, सीसीआई के वकील ने एनसीएलएटी के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति जताई। 

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप यूजर डेटा साझा करने के लिए मेटा की कड़ी आलोचना की थी। 3 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "हम यूजर की जानकारी के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं देंगे। यह अदालत आम लोगों के लिए है, न कि किसी अरबों रुपये की अंतरराष्ट्रीय कंपनी के लिए। नागरिकों की निजता एक मौलिक अधिकार है।"

सुप्रीम कोर्ट ने मेटा को अनुमति देने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने मेटा से कड़े शब्दों में पूछा, "आप उन उपयोगकर्ताओं को ऑप्ट-आउट का विकल्प देंगे जो डेटा साझा करने के इच्छुक नहीं हैं। लेकिन क्या सड़क किनारे फल बेचने वाला आपकी शर्तों को समझ सकता है? आपकी शर्तें इतनी जटिल भाषा में लिखी गई हैं कि हम भी उन्हें समझ नहीं सकते। यह एक प्रकार की चोरी है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने व्हाट्सएप को निर्देश देते हुए कहा, "हम आपको मेटा के साथ कोई भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे। हम आपको इस देश की गोपनीयता नीतियों के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देंगे।"

इस पूरे मामले में अदालत के समक्ष तीन मुख्य अपीलें थीं। मेटा, व्हाट्सएप और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने आवेदन दायर किए थे। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इन अपीलों का प्रतिनिधित्व किया। सुनवाई के दौरान, मेटा के वकील ने तर्क दिया कि अदालत के आदेशानुसार 213 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा किया जा चुका है।

अपीलों की सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष होगी।

व्हाट्सएप के वकील ने दलील दी कि उसकी नीतियां अन्य अंतरराष्ट्रीय न्यायक्षेत्रों के मानदंडों के अनुरूप हैं। हालांकि, इन दलीलों को सुनने के बाद, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एनसीएलएटी के समक्ष जनवरी 2025 के आदेश की स्थिति अभी भी प्रासंगिक है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने अब सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं। इन अपीलों पर अब सर्वोच्च न्यायालय की तीन-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष विस्तार से सुनवाई होगी।