Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को उनके लंबी और विशिष्ट राजनीतिक सेवा के लिए पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता और आरएसएस से जुड़े कोश्यारी ने उत्तराखंड भाजपा के पहले प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी सेवा दी।
राजनीतिक सफर और चुनौतियां
भगत सिंह कोश्यारी ने 1989 में अल्मोड़ा संसदीय सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें केवल 9.32 प्रतिशत वोट मिले। तब उनकी उम्र 47 वर्ष थी और इस हार के बाद उन्होंने संसदीय चुनावों से लगभग अघोषित संन्यास लिया। 1980 और 1984 में लगातार हारने के बाद भी उन्होंने राजनीतिक संघर्ष जारी रखा।
लंबा इंतजार और सफलता
1989 की हार के बाद भगत सिंह कोश्यारी को लोकसभा में जगह मिलने के लिए 25 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। यह इंतजार 2014 में मोदी लहर के दौरान समाप्त हुआ, जब उन्होंने नैनीताल-ऊधम सिंह नगर संसदीय सीट से जीत हासिल की और लोकसभा सदस्य बने।
उत्तराखंड और महाराष्ट्र में प्रभाव
कोश्यारी ने उत्तराखंड और महाराष्ट्र दोनों में अपनी राजनीतिक छाप छोड़ी। उन्होंने राज्य निर्माण आंदोलन और भाजपा के संगठनात्मक कार्यों में अहम भूमिका निभाई। उनकी सक्रियता और नेतृत्व कौशल ने उन्हें दोनों राज्यों में सम्मान और प्रभाव दिलाया।
आरएसएस और भाजपा में योगदान
कोश्यारी आरएसएस से जुड़े रहे और उत्तराखंड भाजपा के पहले प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनका संगठनात्मक अनुभव और दूरदर्शिता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई।




