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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) का रणक्षेत्र अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध में अब दो बड़े मुस्लिम देश—सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)—भी सीधे तौर पर उतरते दिख रहे हैं। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की ताजा रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है, जिसके अनुसार ये दोनों देश अब ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के साथ खड़े होने को तैयार हैं। ईरान की हालिया कार्रवाइयों ने खाड़ी देशों के शेखों को इस कदर नाराज कर दिया है कि वे अब अपने ही एक पड़ोसी मुस्लिम मुल्क के खिलाफ मोर्चा खोलने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

ईरान की बड़ी गलती: सऊदी और UAE में अमेरिकी ठिकानों पर हमले

तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब अमेरिका और इजराइल के हमलों से बौखलाए ईरान ने अपनी मिसाइलों का रुख सऊदी अरब और UAE की ओर कर दिया। ईरान ने इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार हमले किए। ईरान की इस कार्रवाई को सऊदी अरब ने अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता का खुला उल्लंघन माना है। जवाब में, सऊदी अरब ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के सैन्य अटैची (Military Attaché) और दूतावास के चार कर्मचारियों को तुरंत देश छोड़ने का फरमान सुना दिया है।

रणनीतिक पलटवार: किंग फहद एयरपोर्ट अब अमेरिका के हवाले

सऊदी अरब ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए अपने किंग फहद हवाई अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति अमेरिकी सेना को दे दी है। गौरतलब है कि इससे पहले सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ अपने हवाई क्षेत्र या अड्डों के उपयोग से साफ इनकार कर दिया था। वहीं, UAE ने भी तेहरान के प्रभाव को कम करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान से जुड़े प्रमुख नेटवर्क केंद्रों, जिनमें एक अस्पताल और एक क्लब शामिल हैं, उन्हें बंद कर दिया है। ये स्थान ईरान के लिए खुफिया और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते थे।

आर्थिक चोट और होर्मुज की नाकाबंदी बनी नाराजगी की वजह

सऊदी अरब और UAE की नाराजगी के पीछे केवल मिसाइल हमले नहीं, बल्कि आर्थिक नुकसान भी है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी किए जाने से इन खाड़ी देशों के तेल निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। उनकी अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है, जिससे इन देशों का धैर्य जवाब दे गया है। खबरों के अनुसार, बहरीन से भी ईरान पर मिसाइलें दागी जाने के वीडियो सामने आए हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि खाड़ी देश अब ईरान की दादागिरी सहने के मूड में नहीं हैं।

क्या मुस्लिम देशों के बीच छिड़ेगा गृहयुद्ध?

वर्तमान हालात इशारा कर रहे हैं कि अब यह युद्ध केवल इजराइल बनाम ईरान नहीं रह गया है, बल्कि एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ अमेरिका-इजराइल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े सऊदी अरब और UAE जैसे प्रभावशाली मुस्लिम राष्ट्र। UAE ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियां (Air Defence Systems) ईरानी गोलाबारी को नाकाम करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं। हालांकि अमेरिका ने अभी तक औपचारिक रूप से खाड़ी देशों के समर्थन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जमीन पर उनकी बढ़ती सक्रियता एक बड़े क्षेत्रीय महायुद्ध की गवाही दे रही है।