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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया के सुलगते हालातों के बीच दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले कई हफ्तों से तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़े अमेरिका और ईरान अब युद्ध विराम (Ceasefire) और समझौते की दिशा में कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत 'सार्थक' रही है, जिसके बाद उन्होंने ईरानी बिजली संयंत्रों पर होने वाले भीषण हमले को फिलहाल 5 दिनों के लिए टाल दिया है। यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो न केवल युद्ध रुकेगा बल्कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी गिरावट आने की उम्मीद है।

ट्रंप का 'अल्टीमेटम' और अचानक बदला रुख

बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को ईरान को बेहद सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर 48 घंटों के भीतर 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का समुद्री रास्ता नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को तबाह कर देगा। पूरी दुनिया सांसें थामकर इस समय सीमा के खत्म होने का इंतजार कर रही थी, लेकिन 23 मार्च को ट्रंप ने अचानक अपने सुर नरम कर लिए। उन्होंने हमले पर 5 दिनों की रोक लगाते हुए संकेत दिया कि पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति काम कर रही है।

ईरान की शर्तें: 'सीधी बात नहीं, पर समझौते को तैयार'

ईरानी सूत्रों ने भी पुष्टि की है कि वॉशिंगटन की पहल पर दोनों देशों के बीच संपर्क स्थापित हुआ है। हालांकि, ईरान ने अपनी गरिमा और राष्ट्रीय हितों को लेकर कुछ सख्त शर्तें रखी हैं:

मध्यस्थों के जरिए वार्ता: ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से आमने-सामने की सीधी बातचीत नहीं करेगा, बल्कि तीसरे पक्ष (मध्यस्थों) के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान होगा।

परमाणु गारंटी: तेहरान परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी देने को तैयार है, बशर्ते उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक के इस्तेमाल की आजादी मिले।

प्रतिबंधों की समाप्ति: ईरान की सबसे बड़ी मांग है कि उस पर लगे सभी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए।

तेल संकट से मिलेगी निजात, दुनिया की नजरें होर्मुज पर

इस संभावित शांति वार्ता का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई चेन बाधित हो गई थी। ट्रंप का मानना है कि समझौता होते ही सप्लाई बहाल होगी और तेल की कीमतें जमीन पर आ जाएंगी। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अभी बातचीत अंतिम चरण में नहीं पहुंची है, लेकिन दोनों पक्षों का बातचीत की मेज पर आना ही 'तीसरे विश्व युद्ध' के टलने का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।