img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोधाभासी बयानों ने इस समय पूरी दुनिया के राजनयिकों और सैन्य विशेषज्ञों के सिर चकरा दिए हैं। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच, ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट किसी मिसाइल से कम घातक साबित नहीं हो रहे हैं। महज 60 मिनट के भीतर ट्रंप ने दो ऐसे बयान दिए हैं, जो एक-दूसरे के बिल्कुल उलट हैं। दुनिया अब इस सोच में डूबी है कि क्या यह ट्रंप की कोई सोची-समझी युद्ध नीति है या फिर व्हाइट हाउस के भीतर ही तालमेल की भारी कमी है।

पहला धमाका: "दुनिया के नक्शे से मिट गया ईरान"

रविवार रात ट्रंप ने अपने पहले सोशल मीडिया पोस्ट से सनसनी फैला दी। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में दावा किया कि अमेरिका ने ईरान पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है। ट्रंप ने लिखा, "अमेरिका ने ईरान को विश्व मानचित्र से मिटा दिया है। उनका नेतृत्व खत्म हो चुका है, नौसेना और वायु सेना पूरी तरह ध्वस्त है। अब उनके पास अपनी रक्षा के लिए कुछ भी नहीं बचा।" इस पोस्ट को पढ़कर ऐसा लगा मानो युद्ध आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है और अमेरिका ने तेहरान पर कब्जा कर लिया है।

यू-टर्न: "48 घंटे में पावर प्लांट उड़ा देंगे"

अभी दुनिया इस 'जीत' के दावे का विश्लेषण कर ही रही थी कि ठीक एक घंटे बाद ट्रंप का दूसरा पोस्ट सामने आया, जिसने पहले दावे की हवा निकाल दी। इस पोस्ट में उन्होंने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा, "अगर ईरान ने अगले दो दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना शर्त नहीं खोला, तो अमेरिका उनके प्रमुख बिजली संयंत्रों (Power Plants) को बमबारी कर नष्ट कर देगा।" इस बयान ने साफ कर दिया कि युद्ध न तो खत्म हुआ है और न ही ईरान पूरी तरह सरेंडर कर चुका है।

बयानों का चक्रव्यूह: मिशन पूरा या अनिश्चितकालीन युद्ध?

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के बयानों ने भ्रम पैदा किया हो। मार्च की शुरुआत से ही उनका रुख ढुलमुल रहा है:

2 मार्च: सुबह कहा- "4 हफ्ते में युद्ध खत्म हो जाएगा", रात को बोले- "हम अनंत काल तक लड़ने को तैयार हैं।"

3 मार्च: दावा किया कि "मिशन पूरा हो गया", लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि "जंग अभी लंबी खिंच सकती है।"

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जहां ट्रंप जीत के दावे कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी रक्षा सचिव हेगसेथ का बयान इसके बिल्कुल विपरीत है। हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा है कि युद्ध का संकट कम होने के बजाय और भी गंभीर और पेचीदा होता जा रहा है।

क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद?

दरअसल, ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को बाधित कर रखा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस समुद्री रास्ते के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम इसी रास्ते को खुलवाने के लिए है, ताकि वैश्विक सप्लाई चेन को फिर से पटरी पर लाया जा सके।