Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के ट्राइसिटी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है और यह गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट अब हाईकोर्ट तक पहुँच गया है। इस गंभीर मुद्दे पर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें कोर्ट से ट्राइसिटी के लिए प्रभावी, समयबद्ध और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र लागू करने की मांग की गई है।
ट्राइसिटी-विशिष्ट संयुक्त समिति की मांग
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि तुरंत एक ट्राइसिटी-विशिष्ट संयुक्त कार्य समिति का गठन किया जाए। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, चंडीगढ़ प्रदूषण बोर्ड, पंजाब प्रदूषण बोर्ड, हरियाणा प्रदूषण बोर्ड और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी शामिल हों।
इस समिति को ट्राइसिटी की भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों के अनुरूप एक ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन ब्लूप्रिंट तैयार करने और उसे अधिसूचित करने का जनादेश देने की मांग भी की गई है।
आपातकालीन स्थिति में कड़े कदम
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) जब ‘गंभीर’ या ‘अत्यंत खतरनाक’ श्रेणी में पहुंचे, तो प्रवर्तन एजेंसियां समयबद्ध और कड़े कदम उठाएं। ये कदम राष्ट्रीय ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की रूपरेखा और भावना के अनुरूप होने चाहिए।
पारदर्शिता और नागरिक जागरूकता
याचिका में यह भी कहा गया है कि वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े, स्रोत-वार प्रदूषण नियंत्रण कार्रवाई, की गई प्रवर्तन गतिविधियां और अनुपालन की स्थिति नियमित रूप से ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ के माध्यम से सार्वजनिक डोमेन में साझा की जाए। इससे नागरिक वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपना सकेंगे।
सर्दियों में विशेष चिंता
याचिकाकर्ता ने बताया कि कम औद्योगिक गतिविधियों और नियोजित शहरी ढांचे के बावजूद, सर्दियों में चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में तीव्र गिरावट देखी जा रही है। उनका कहना है कि यह संकट अचानक नहीं आया है, बावजूद इसके संबंधित प्राधिकरण अब तक GRAP जैसे चरणबद्ध आपात प्रतिक्रिया तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल रहे हैं।
हाई कोर्ट इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा और ट्राइसिटी के वायु प्रदूषण संकट को लेकर जल्द निर्णय की संभावना जताई जा रही है।




