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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस के संयुक्त सत्र (SOTU 2026) में एक ऐसी घोषणा कर दी है, जिसने न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह आयात शुल्क (Tariff) के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ही चुनौती क्यों न देनी पड़े। ट्रंप ने संकेत दिया है कि भविष्य में विदेशी देशों से वसूला जाने वाला टैरिफ, अमेरिकी नागरिकों के 'आयकर' (Income Tax) की जगह ले सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप का पलटवार: 'बेहद दुखद निर्णय'

यह पूरा विवाद 20 फरवरी 2026 को आए अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले से शुरू हुआ, जिसमें 6-3 के बहुमत से ट्रंप के टैरिफ लगाने के अधिकारों को रद्द कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति के पास 'अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम' (IEEPA) के तहत टैक्स लगाने की शक्ति नहीं है, यह अधिकार केवल कांग्रेस के पास है। इस पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे "बेहद दुखद" बताया और कहा कि वह वैकल्पिक कानूनी रास्तों के जरिए अपने टैरिफ जारी रखेंगे।

क्या अब अमेरिका में खत्म हो जाएगा इनकम टैक्स?

ट्रंप ने अपने संबोधन में एक क्रांतिकारी विचार पेश किया। उन्होंने दावा किया कि विदेशी देशों पर लगाए गए आयात शुल्क से अमेरिका को सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई हो रही है। ट्रंप ने कहा, "मेरा मानना है कि समय के साथ यह विदेशी कर प्रणाली मौजूदा आयकर (Income Tax) की जगह ले लेगी। इससे मेरे देशवासियों पर से वित्तीय बोझ पूरी तरह हट जाएगा।" ट्रंप का तर्क है कि जो देश दशकों से अमेरिका को 'लूट' रहे थे, अब वे अमेरिका के विकास के लिए अरबों डॉलर दे रहे हैं।

टैरिफ को बताया शांति का हथियार: 'बिना युद्ध खत्म किए विवाद'

राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ को केवल एक आर्थिक टूल नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक हथियार भी करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इन शुल्कों की वजह से ही कई अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझे हैं और युद्धों को समाप्त करने में मदद मिली है। ट्रंप ने कहा कि विदेशी कंपनियां और देश अभी भी मौजूदा समझौतों को मानना चाहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि राष्ट्रपति के पास और भी कड़े सौदे करने की कानूनी शक्ति मौजूद है।

विपक्ष और विशेषज्ञों की बढ़ी चिंता

भले ही ट्रंप 10% के नए वैश्विक टैरिफ और 'लिबरेशन डे' शुल्कों पर अड़े हुए हैं, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजरअंदाज करना एक बड़े संवैधानिक संकट को जन्म दे सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वह कांग्रेस की मंजूरी के बिना भी "परीक्षित वैकल्पिक कानूनों" के तहत अपना एजेंडा आगे बढ़ाएंगे। अब देखना यह होगा कि व्हाइट हाउस और न्यायपालिका के बीच की यह जंग क्या मोड़ लेती है।