Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगने के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी व्यापारिक जिद को एक नया मोड़ दे दिया है। कोर्ट द्वारा 'इमरजेंसी' टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद, ट्रंप ने अब 'सेक्शन 122' (Trade Act of 1974) का इस्तेमाल करते हुए दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है।
यह नया नियम 24 फरवरी 2026 की आधी रात से प्रभावी हो जाएगा। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि भारत समेत सभी व्यापारिक साझेदारों को इस नए टैक्स के दायरे में आना होगा।
सुप्रीम कोर्ट का झटका और ट्रंप का पलटवार: क्या है पूरा विवाद?
शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति के पास IEEPA (1977) के तहत बिना संसद की मंजूरी के मनमाने टैक्स थोपने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने ट्रंप के पुराने फैसलों को 'असंवैधानिक' बताया, जिससे अमेरिकी खजाने पर 130 से 175 अरब डॉलर तक के रिफंड का बोझ आ सकता है।
इस फैसले से तिलमिलाए ट्रंप ने इसे "हास्यास्पद" बताया और तुरंत एक नया कार्यकारी आदेश जारी कर दिया। उन्होंने कहा, "अदालत कहती है कि मैं एक डॉलर नहीं ले सकता, लेकिन मेरे पास और भी रास्ते हैं।"
भारत पर असर: राहत या नई आफत?
भारत के लिए यह खबर मिली-जुली भावनाओं वाली है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
शुल्क में कमी: पहले भारत पर 'रेसिप्रोकल टैरिफ' के तहत 18% तक का बोझ था, जो अब घटकर 10% रह जाएगा। इस लिहाज से भारतीय निर्यातकों को 8% की सीधी राहत मिलती दिख रही है।
नई जटिलताएं: ट्रंप ने साफ किया है कि स्टील और एल्युमीनियम पर लगे पुराने 'नेशनल सिक्योरिटी टैरिफ' (Section 232) और 'अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस' के तहत लगने वाले टैक्स जारी रहेंगे। यानी 10% का यह नया ग्लोबल टैक्स पुराने टैक्स के ऊपर अतिरिक्त रूप से भी जुड़ सकता है।
सेक्टरवार प्रभाव: कपड़ा, रत्न एवं आभूषण और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों को कम दर से राहत मिलेगी, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के कारण निर्यात की लागत में अनिश्चितता बनी रहेगी।
150 दिनों का 'अल्टीमेटम' और धारा 122 का खेल
ट्रंप ने जिस धारा 122 का उपयोग किया है, वह अमेरिकी राष्ट्रपति को 'भुगतान संतुलन घाटे' (Trade Deficit) को सुधारने के लिए 150 दिनों तक अधिकतम 15% टैक्स लगाने की अनुमति देती है। इसका मतलब है कि यह 10% का टैक्स फिलहाल अस्थायी है। अगर ट्रंप इसे आगे बढ़ाना चाहेंगे, तो उन्हें अमेरिकी कांग्रेस (संसद) से मंजूरी लेनी होगी, जो उनके लिए एक नई राजनीतिक जंग साबित हो सकती है।
निर्यातकों के लिए आगे की राह
भारत के लिए यह समय सतर्क रहने का है। हालांकि टैरिफ दरों में गिरावट एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू की गई नई 'सेक्शन 301' जांच भारतीय डिजिटल सर्विस टैक्स और अन्य व्यापारिक नीतियों को फिर से निशाने पर ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च में होने वाले प्रस्तावित व्यापार समझौते पर अब इस नए घटनाक्रम का गहरा असर पड़ेगा।




