Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अंतरराष्ट्रीय राजनीति में 'स्थायी दुश्मन' नहीं, सिर्फ 'स्थायी स्वार्थ' होते हैं। इसका ताजा उदाहरण अमेरिका और भारत के बीच तेल खरीद को लेकर देखने को मिला है। ईरान-इजराइल के बीच जारी महायुद्ध (Iran-Israel War 2026) के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दे दी है। यह फैसला चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि कुछ ही हफ्ते पहले अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था।
ईरान युद्ध ने बिगाड़ा ग्लोबल मार्केट का समीकरण
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए ईरान-इजराइल युद्ध ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। ईरान ने भारत सहित दुनिया के कई देशों को तेल की आपूर्ति रोक दी है। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। इस मार्ग पर बढ़ते खतरे की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। वैश्विक बाजार में तेल की कमी न हो, इसलिए ट्रंप प्रशासन ने भारत को 'स्टॉप-गैप' के तौर पर रूस से तेल लेने की मंजूरी दी है।
ट्रंप का मूड बदलने की असली वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला कोई 'तोहफा' नहीं बल्कि मजबूरी है। इसकी तीन मुख्य वजहें हैं:
अमेरिकी चुनाव और महंगाई: अमेरिका में इसी साल मिड-टर्म चुनाव होने हैं। अगर वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति कम होती है, तो अमेरिका में पेट्रोल के दाम बढ़ेंगे, जो ट्रंप के लिए राजनीतिक नुकसान होगा।
फंसे हुए टैंकरों को रास्ता देना: समुद्र में रूस के कई तेल टैंकर फंसे हुए थे। अमेरिकी वित्त विभाग के सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह छूट केवल उन्हीं टैंकरों के लिए है जो पहले से समुद्र में थे, ताकि मार्केट में तेल का फ्लो बना रहे।
भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी: अमेरिका भारत को एक 'अनिवार्य भागीदार' मानता है। खाड़ी देशों से आपूर्ति ठप होने पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में थी, जिसे देखते हुए अमेरिका ने अपने कड़े प्रतिबंधों में ढील दी है।
क्या रूस को होगा बड़ा फायदा?
अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury) ने साफ किया है कि यह छूट केवल 4 अप्रैल 2026 तक वैध है। उनका दावा है कि इस अल्पकालिक कदम से रूस को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उन सौदों के लिए है जो पहले से प्रक्रिया में थे। हालांकि, भारत के लिए यह बड़ी राहत है क्योंकि भारत का लगभग 40% तेल आयात मिडिल ईस्ट से आता है, जो युद्ध के कारण अधर में लटका है।
भारत के लिए आगे की राह
भारत के पास फिलहाल करीब 25 से 45 दिनों का तेल भंडार है। सरकार स्थिति की हर 12 घंटे में समीक्षा कर रही है। अमेरिका ने उम्मीद जताई है कि 30 दिनों के बाद भारत अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाएगा। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 30 दिन बाद यह छूट और आगे बढ़ती है या ट्रंप फिर से प्रतिबंधों का डंडा चलाते हैं।




