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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के लिए वर्ष 2025 केवल एक कैलेंडर का पन्ना नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव और विकास का वर्ष साबित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'अंत्योदय' संकल्प के तहत स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा सेवाओं को गांव-गली तक सुलभ, किफायती और आधुनिक बनाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की।

इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व बढ़ोतरी

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष के अनुसार, इमरजेंसी कोविड रिलीफ पैकेज (ECRP) के प्रभावी क्रियान्वयन से चिकित्सा ढांचा और भी मजबूत हुआ।

इस वर्ष प्रदेश को 83 नई स्वास्थ्य इकाइयों की सौगात मिली, जिसमें 26 आईपीएचएल लैब और 38 फील्ड अस्पताल शामिल हैं। सीतापुर में 200 बेड वाला नया जिला अस्पताल इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा।

क्रिटिकल केयर में विस्तार

गंभीर मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेजों में 1,800 और जिला अस्पतालों में 1,029 नए आईसीयू बेड स्थापित किए गए। इसके साथ ही 49 एलएमओ स्टोरेज टैंकों के जरिए ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की गई।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर फोकस

मिशन निदेशक एनएचएम डॉ पिंकी जोवल के अनुसार, प्रदेश सरकार का विशेष ध्यान 'मां और मासूम' की सुरक्षा पर रहा।

पीडियाट्रिक केयर: बच्चों के बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पतालों में 42-बेड वाली और मेडिकल कॉलेजों में 23 पीडियाट्रिक यूनिट्स संचालित की गई।

न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन: नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने के लिए प्रदेशभर में 412 'न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट्स' (NBSU) सक्रिय की गईं। इन प्रयासों से सरकारी अस्पतालों में बाह्य रोगी (OPD) सेवाओं में 27% और अंतः रोगी (IPD) सेवाओं में 32% से अधिक वृद्धि देखी गई।

डिजिटल हेल्थ और आयुष्मान भारत

प्रदेश ने तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को घर के पास पहुंचाया।

टेलीमेडिसिन: 'ई-संजीवनी' पोर्टल के जरिए यूपी प्रतिदिन 75 हजार से अधिक कॉल्स के साथ देश में दूसरे स्थान पर रहा।

आयुष्मान भारत: योजना में 318 नए अस्पताल जोड़े गए, खासकर कैंसर उपचार पर ध्यान दिया गया। वर्ष के अंत तक अस्पतालों को ₹3,862 करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान किया गया।

टीबी मुक्त यूपी और अन्य उपलब्धियां

टीबी उन्मूलन में उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। 7,191 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित करना (424% की वृद्धि) एक बड़ी उपलब्धि रही।

इसके अलावा, 2,249 नई एंबुलेंस और सभी 75 जिलों में डायलिसिस सेवाओं की उपलब्धता ने यह सुनिश्चित किया कि अब उत्तर प्रदेश के किसी भी वासी को इलाज के लिए महानगरों की ओर भागना न पड़े।

उत्तर प्रदेश ने इस वर्ष स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मानक स्थापित किए हैं और अगले वर्षों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।