Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड के न्यायिक गलियारे से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जिला कोर्ट के बाद अब उत्तराखंड हाई कोर्ट को बम से उड़ाने का धमकी भरा ई-मेल मिला है। इस सूचना के बाद नैनीताल में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पूरी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं। खतरे को भांपते हुए पुलिस ने पूरे न्यायालय परिसर को सील कर दिया है और चप्पे-चप्पे पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
न्यायालय परिसर सील, सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए जज
धमकी भरा ई-मेल मिलने के तुरंत बाद एसएसपी मंजूनाथ टीसी भारी पुलिस बल के साथ हाई कोर्ट पहुंचे। सुरक्षा कारणों से मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) मनोज कुमार गुप्ता सहित अन्य सभी न्यायाधीशों को उनके कोर्ट रूम से हटाकर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। न्यायालय में प्रवेश के सभी द्वारों को बंद कर दिया गया है और आम जनता की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है।
बम स्क्वाड और डॉग स्क्वाड कर रहे तलाशी
परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बम डिस्पोजल दस्ता (BDS) और डॉग स्क्वाड को मौके पर तैनात किया गया है। पुलिस की विभिन्न टीमें हाई कोर्ट के अंदर और बाहर हर कोने की बारीकी से जांच कर रही हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश सिंह रावत ने पुष्टि की है कि धमकी भरा मेल रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय में प्राप्त हुआ था। इसके बाद पूरे परिसर को 'सैनिटाइज' किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।
चीफ जस्टिस ने बुलाई आपात बैठक
हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने वरिष्ठ न्यायाधीशों और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने और अदालती कार्यवाही को सुरक्षित ढंग से संचालित करने पर चर्चा हुई। फिलहाल अधिवक्ता और कर्मचारी न्यायालय परिसर के खुले मैदान में एकत्रित हैं और जांच पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर 'धमकी भरा मेल'
एसएसपी मंजूनाथ टीसी, एसपी जगदीश चंद्र और हाई कोर्ट के सुरक्षा अधिकारी खुद ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। साइबर सेल की मदद से ई-मेल के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रेस किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह शरारत है या किसी गहरी साजिश का हिस्सा। हाल के दिनों में जिला कोर्ट को भी ऐसी ही धमकी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को और भी गंभीरता से ले रही हैं।




