सीएम का अनूठा अंदाज, आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर नन्हे-मुन्ने बच्चों को किया दुलार
देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से अक्सर नीतिगत फैसलों और विकास कार्यों की खबरें सामने आती हैं, लेकिन कई बार राजनेताओं का एक बेहद मानवीय और संवेदनशील पहलू भी जनता के सामने आता है जो हर किसी का दिल जीत लेता है. राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने अपने व्यस्त और कड़े प्रशासनिक कामकाज के बीच एक बार फिर कुछ ऐसा ही अनूठा उदाहरण पेश किया है, जिसकी चर्चा आज पूरे प्रदेश में हो रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हाल ही में आयोजित किए गए खास 'आंगन मिलन' कार्यक्रम के दौरान अचानक एक स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र जा पहुंचे, जहां उन्होंने किसी प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना जमीन पर बैठकर छोटे-छोटे बच्चों के साथ वक्त बिताया. नन्हे-मुन्ने बच्चों को अपने हाथों से दुलारना, उनके साथ हंसी-मजाक करना और आंगनबाड़ी की व्यवस्थाओं का खुद जायजा लेना यह साबित करता है कि एक जननेता अपनी जनता और आने वाली पीढ़ी के साथ किस हद तक जुड़ा हुआ महसूस करता है. बच्चों की किलकारियों और मुख्यमंत्री के इस सहज, सरल व आत्मीय स्वभाव ने उस पूरे प्रांगण का माहौल पूरी तरह से खुशनुमा बना दिया, और वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरों पर एक गहरी मुस्कान बिखर गई.
'आंगन मिलन' कार्यक्रम के तहत जमीनी हकीकत परखने पहुंचे थे मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में नौनिहालों के शुरुआती विकास, पोषण और शिक्षा स्तर को मजबूत करने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं. इसी मुहिम के तहत बच्चों के विकास और आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर परखने के लिए 'आंगन मिलन' जैसे सामुदायिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्यक्रम के तहत जब औचक रूप से आंगनबाड़ी केंद्र का दौरा किया, तो वहां मौजूद शिक्षिकाओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय महिलाओं को अपनी इस बीच पाकर बेहद सुखद आश्चर्य हुआ. मुख्यमंत्री ने केंद्र के भीतर बच्चों के बैठने की व्यवस्था, मिलने वाले पौष्टिक आहार (Nutritional Food), साफ-सफाई और खेलकूद की सामग्रियों का बेहद बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं से यह भी संवाद किया कि क्या बच्चों को समय पर सभी सरकारी सुविधाएं मिल पा रही हैं या नहीं, और यदि किसी चीज की कमी है तो उसे तुरंत दूर करने के निर्देश भी मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को दिए.
बच्चों के साथ बच्चे बन गए मुख्यमंत्री, नन्हे हाथों से की गई मासूमियत भरी बातें
इस दौरे का सबसे खूबसूरत और भावनात्मक पल वह था जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सभी औपचारिकताएं छोड़कर सीधे बच्चों के बीच जमीन पर बैठ गए. उन्होंने एक-एक बच्चे को प्यार से अपनी गोद में उठाया, उनके गाल थपथपाए और बहुत ही दुलार के साथ उनसे बातचीत की. बच्चों ने भी बिना किसी झिझक के अपने मुख्यमंत्री से मासूमियत भरे अंदाज में बातें कीं, जिसे देखकर वहां मौजूद हर कोई भावुक हो गया. मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट और बिस्कुट बांटे तथा उन्हें प्यार से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि ये नन्हे-मुन्ने बच्चे ही हमारे देश और प्रदेश का भविष्य हैं, और इनके शारीरिक तथा मानसिक विकास की नींव मजबूत करने में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका सबसे अहम होती है. इसलिए यह हम सबका सामूहिक दायित्व है कि हम इन्हें बेहतर से बेहतर माहौल और पोषण प्रदान करें ताकि ये आगे चलकर एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें.
उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण और बाल विकास योजनाओं को मिल रही है नई गति
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पिछले कुछ समय में महिलाओं, गर्भवती माताओं और छोटे बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए कई कड़े और प्रभावी प्रशासनिक कदम उठाए हैं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय, केंद्रों के आधुनिकीकरण और पोषण ट्रैकर्स के जरिए पारदर्शिता लाने के मामले में राज्य सरकार लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है. मुख्यमंत्री का इस प्रकार खुद जमीनी स्तर पर जाकर औचक निरीक्षण करना और 'आंगन मिलन' जैसे कार्यक्रमों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होना यह दर्शाता है कि सरकार केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर कितनी गंभीर है. स्थानीय जनता और अभिभावकों ने मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील और जनहितैषी कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है. इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एक कड़क प्रशासक होने के साथ-साथ एक संवेदनशील इंसान होना किसी भी राजनेता की सबसे बड़ी खूबी होती है, और मुख्यमंत्री धामी ने इस बार फिर से जनता के दिलों में अपनी एक अलग और अनूठी छाप छोड़ी है.