धामी सरकार ने पेश किया 7844 करोड़ का बजट, जानें कहां खर्च होंगे 1-1 रुपये, 1100 करोड़ गेहूं-धान खरीद के लिए

धामी सरकार ने पेश किया 7844 करोड़ का बजट, जानें कहां खर्च होंगे 1-1 रुपये, 1100 करोड़ गेहूं-धान खरीद के लिए

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य के सर्वांगीण विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं को नई रफ़्तार देने के लिए विधानसभा में 7844 करोड़ रुपये का विशाल अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) पेश कर दिया है। वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा सदन के पटल पर रखे गए इस बजट में राज्य के बुनियादी ढांचे, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवस्थापना विकास को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार ने इस बजट के माध्यम से यह साफ संदेश दे दिया है कि प्रदेश के अन्नदाताओं से लेकर युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। रिपोर्टर की विस्तृत पड़ताल के अनुसार, इस बजट के एक-एक रुपये का आवंटन राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

किसानों और अन्नदाताओं के लिए 1100 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन

धामी सरकार के इस 7844 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण आकर्षण राज्य के किसानों के लिए किया गया विशेष प्रावधान है। राज्य सरकार ने अन्नदाताओं के हितों की रक्षा करने और फसल खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी व तेज बनाने के लिए 1100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि केवल गेहूं और धान की सरकारी खरीद के लिए समर्पित की है। इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों को समय पर अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सीधी भुगतान राशि मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त, कृषि और संबंधित क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों के समावेश, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष बजटीय बजटीय सहायता दी गई है, जिससे राज्य के काश्तकारों की आय में वृद्धि होना तय माना जा रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष फोकस

उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी राज्य में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा विकास की रीढ़ होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए धामी सरकार ने बजट में लोक निर्माण विभाग (PWD), पुल निर्माण और राज्य राजमार्गों के सुदृढ़ीकरण के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। राज्य के सुदूरवर्ती सीमांत गाँवों को मुख्यधारा से जोड़ने, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुलों और सड़कों के त्वरित पुनर्निर्माण तथा चारधाम यात्रा मार्ग पर यातायात को सुगम बनाने के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की गई है। इसके साथ ही, शहरी विकास और पेयजल योजनाओं के लिए भी बजट में बड़ा हिस्सा रखा गया है, ताकि हर घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और शहरों में आधुनिक सीवरेज व कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा सके।

शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा स्वरोजगार योजनाओं को मिला बढ़ावा

राज्य के सामाजिक क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा के बजट में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी की गई है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण जुटाने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने और मुफ्त दवा वितरण योजना के संचालन के लिए बड़ा फंड जारी किया गया है। इसके अलावा, राज्य के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत बजटीय सहायता बढ़ाई गई है। स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने, डिजिटल क्लासरूम स्थापित करने और उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए भी अलग से प्रावधान किए गए हैं, जिससे राज्य का युवा वर्ग आत्मनिर्भर बन सके।

महिलाओं, सामाजिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए ठोस बजटीय प्रावधान

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और समाज में महिलाओं के अतुलनीय योगदान को देखते हुए धामी सरकार ने महिला सशक्तिकरण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए भी खजाना खोल दिया है। नंदा गौरा योजना और विभिन्न पेंशन योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए धनराशि का आवंटन किया गया है, जिससे बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को समय पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिल सकेगी। वहीं दूसरी ओर, प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील इस राज्य में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए अग्रिम धनराशि का प्रावधान किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य संचालित किए जा सकें। कुल मिलाकर, धामी सरकार का यह 7844 करोड़ रुपये का बजट राज्य के समावेशी विकास का एक संतुलित खाका पेश करता है।