Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी खूनी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जहाँ से तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। इस्राइल ने एक बार फिर अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद की सटीक जानकारी पर ईरान के दिल यानी तेहरान में घुसकर बड़ा हमला बोला है। इस भीषण हवाई हमले में ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के मुख्य प्रवक्ता और देश के खुफिया मंत्री की मौत की खबर ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। ईरान के सैन्य और रणनीतिक नेतृत्व पर यह अब तक का सबसे सीधा और घातक प्रहार माना जा रहा है, जिससे पूरे ईरान में मातम के साथ-साथ प्रतिशोध की आग भड़क उठी है।
सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सटीकता और मलबे में तब्दील हुई इमारत
राजधानी तेहरान के हाई-सिक्योरिटी जोन में हुए इस हमले ने ईरान के सुरक्षा घेरे की पोल खोल कर रख दी है। बताया जा रहा है कि इस्राइली लड़ाकू विमानों ने उस गुप्त ठिकाने को निशाना बनाया जहाँ IRGC के प्रवक्ता और खुफिया मंत्री एक महत्वपूर्ण सुरक्षा बैठक कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि पल भर में बहुमंजिला इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इस हमले की सटीकता ने यह साफ कर दिया है कि इस्राइल के पास ईरान के भीतर की पल-पल की जानकारी मौजूद है। हमले के तुरंत बाद तेहरान के आसमान में ईरानी इंटरसेप्टर मिसाइलों और लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनाई देने लगी, लेकिन तब तक शिकारी अपना काम कर चुका था।
ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकी और दुनिया में खौफ
अपने दिग्गज नेताओं को खोने के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने आपातकालीन बैठक बुलाई है। ईरान की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस कायरतापूर्ण हमले का बदला 'सही समय और सही जगह' पर लिया जाएगा। इस घटना के बाद लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूतियों और गाजा में हमास को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब सीधे तौर पर इस्राइल के महत्वपूर्ण ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बना सकता है। अगर ऐसा होता है, तो पूरा मध्य पूर्व भीषण युद्ध की आग में झुलस सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।
अमेरिका की भूमिका और इस्राइल का आक्रामक रुख
इस हमले के बाद व्हाइट हाउस की ओर से भी बयान जारी किया गया है, जिसमें स्थिति पर पैनी नजर रखने की बात कही गई है। हालांकि, इस्राइल ने इस हमले पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के तेवर साफ बता रहे हैं कि वे अपने दुश्मनों को उनके घर में घुसकर मारने की नीति पर अडिग हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का कहना है कि यह हमला केवल दो नेताओं की मौत नहीं है, बल्कि ईरान के पूरे खुफिया तंत्र के मनोबल को तोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति है। अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं, जो इस क्षेत्र का भविष्य तय करेगा।
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