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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय थाली की कल्पना बिना रोटी के करना लगभग असंभव है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, गेहूं से बनी रोटियां हमारे दैनिक आहार का सबसे अहम हिस्सा हैं। हम इसे सबसे सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मानते हैं, लेकिन हालिया शोध और विशेषज्ञों की राय ने एक नई बहस छेड़ दी है। गुरुग्राम के मशहूर विशेषज्ञ डॉ. मनु बोरा के अनुसार, जिसे हम सबसे सादा भोजन समझते हैं, वह वास्तव में हमारे शरीर के लिए 'साइलेंट किलर' भी साबित हो सकता है।

क्या गेहूं वाकई चीनी से भी ज्यादा खतरनाक है?

डॉ. मनु बोरा ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा है कि यदि हमारे आहार में कोई एक चीज़ सबसे ज्यादा नुकसानदेह हो सकती है, तो वह गेहूं है। उनका तर्क है कि लोग हर दिन मिठाई या तला-भुना खाना नहीं खाते, लेकिन रोटी का सेवन दिन में दो से तीन बार अनिवार्य रूप से करते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक गेहूं में ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी अधिक होता है, जो रक्त में शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ा सकता है। यह स्थिति मोटापे और मेटाबॉलिज्म संबंधी विकारों को जन्म देती है।

गेहूं के अत्यधिक सेवन से होने वाले 3 बड़े नुकसान

शरीर में सूजन (Inflammation): गेहूं में मौजूद ग्लूटेन और अन्य प्रोटीन कुछ लोगों के शरीर में पुरानी सूजन का कारण बन सकते हैं, जिससे जोड़ों में दर्द और पाचन की समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

मेटाबॉलिक डिसऑर्डर: अधिक मात्रा में प्रसंस्कृत (Processed) गेहूं का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा कर सकता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

वजन का बढ़ना: गेहूं के परिष्कृत रूप (मैदा या बारीक पिसा आटा) का सेवन करने से पेट की चर्बी (Visceral Fat) तेजी से बढ़ती है, जिसे 'वीट बेली' भी कहा जाता है।

क्या रोटी खाना पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?

डॉ. बोरा और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या रोटी में नहीं, बल्कि इसकी मात्रा और गुणवत्ता में है। पूरी तरह गेहूं छोड़ने के बजाय ये विकल्प बेहतर हो सकते हैं:

मिलेट्स का चुनाव: ज्वार, बाजरा, रागी और जौ जैसे मोटे अनाजों को अपने आहार में शामिल करें। ये ग्लूटेन-फ्री होते हैं और धीरे पचते हैं।

होल ग्रेन आटा: बाजार के बारीक पिसे आटे के बजाय चोकरयुक्त (Whole Wheat) आटे का प्रयोग करें।

संतुलन है जरूरी: अपनी थाली में अनाज की मात्रा कम करें और सब्जियों, दालों तथा प्रोटीन के स्रोतों को अधिक जगह दें।