भारतीय दवा कंपनी के प्लांट पर हुए भीषण हमले में एक कर्मचारी की दर्दनाक मौत

भारतीय दवा कंपनी के प्लांट पर हुए भीषण हमले में एक कर्मचारी की दर्दनाक मौत

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के दौरान तबाही का दायरा अब लगातार उन प्रतिष्ठानों तक पहुंच गया है जो प्रत्यक्ष रूप से युद्ध का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं. ताजा और बेहद सनसनीखेज मामलों के तहत रूसी सेना द्वारा यूक्रेन के विभिन्न इलाकों में एक ही रात में ताबड़तोड़ 135 से अधिक ड्रोन से भीषण हमले किए गए. इन सुनियोजित और बड़े पैमाने पर किए गए ड्रोन हमलों के दौरान यूक्रेन के सुमी (Sumy) शहर में स्थित एक प्रमुख भारतीय स्वामित्व वाली दवा कंपनी (Indian-owned pharmaceutical warehouse/plant) के प्लांट और वेयरहाउस को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया. इस खौफनाक हमले में प्लांट के भीतर काम कर रहे 52 वर्षीय एक स्थानीय कर्मचारी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए. इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि किसी भारतीय स्वामित्व वाले नागरिक और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे पर इस तरह का सीधा हमला पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सामने आया है, जिससे भारत की कूटनीति और रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं.

सुमी शहर में भारतीय दवा कंपनी के वेयरहाउस पर कैसे हुआ यह खतरनाक हमला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रूसी सेना ने रात के वक्त यूक्रेन के नागरिक और बुनियादी ढांचों को दहलाने के लिए बड़े पैमाने पर कामिकेज ड्रोन (Kamikaze Drones) का इस्तेमाल किया था. सुमी शहर में स्थित जिस दवा गोदाम और प्लांट पर यह हमला हुआ, वह भारतीय निवेशकों द्वारा संचालित एक प्रसिद्ध फार्मास्यूटिकल कंपनी 'कुसुम फार्मा' (Kusum Pharma) से जुड़ा बताया जा रहा है, जो क्षेत्र में जीवन रक्षक और जरूरी दवाओं की आपूर्ति का एक बड़ा केंद्र माना जाता है. अचानक आसमान से आए विस्फोटकों से लदे ड्रोनों ने सीधे इस दवा गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां भीषण आग लग गई और इमारत का एक बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया. जिस वक्त यह हमला हुआ, उस समय प्लांट के अंदर नाइट शिफ्ट में काम कर रहे कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर तैनात थे. इस अचानक हुए धमाके की चपेट में आने से 52 वर्षीय एक कर्मचारी की मौके पर ही जान चली गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए और मलबे के नीचे दब गए. स्थानीय राहत और बचाव दलों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है.

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का कड़ा बयान, भारतीय स्वामित्व वाले प्लांट को लेकर जताई गहरी चिंता

इस पूरे सनसनीखेज हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की है और मारे गए कर्मचारी के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है. राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया और अपने संबोधन में कहा कि रूसी हमलावरों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किसी सैन्य ठिकाने को निशाना बना रहे हैं या फिर किसी नागरिक और स्वास्थ्य संस्थान को. उन्होंने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि यह प्लांट भारतीय मालिकों का था और यहां आम जनता व बच्चों के लिए बेहद जरूरी जीवन रक्षक दवाइयों का उत्पादन और भंडारण किया जाता था. इसके अलावा, भारत में स्थित यूक्रेनी दूतावास की तरफ से भी इस हमले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है, जिसमें यह कहा गया है कि इस तरह के हमलों ने यह साबित कर दिया है कि युद्ध के दौरान मानवाधिकारों और नागरिक संपत्तियों की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है. इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि कैसे युद्ध के इस दौर में अब विदेशी निवेशकों और खासकर भारतीयों की संपत्तियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

भारत की संतुलित विदेश नीति और इस घटना के बाद क्षेत्रीय कूटनीति पर पड़ने वाले प्रभाव

भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही पूरी तरह से एक तटस्थ और कूटनीति आधारित संतुलित रुख (Balanced Stance) अपना रखा है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार यह बात दोहराई गई है कि इस समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है. कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी नेतृत्व के बीच हुई बैठकों में भी शांति स्थापना को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन इस बीच भारतीय स्वामित्व वाले दवा प्लांट पर हुए इस ड्रोन हमले ने नई भू-राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भले ही सीधे तौर पर भारत सरकार की नीति को न बदलें, लेकिन यह जरूर साबित करती हैं कि युद्ध के मैदान में होने वाली अंधाधुंध गोलाबारी से किसी भी देश के नागरिक हित सुरक्षित नहीं रह पा रहे हैं. आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार इस पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाती है और मास्को के सामने इस सुरक्षा चूक तथा नुकसान को किस तरह से उठाया जाता है.