Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के प्रति बढ़ता क्रेज और ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ते कदम एक बड़ी चुनौती के घेरे में हैं। हालिया रिपोर्टों और आंकड़ों ने ईवी मालिकों और भविष्य के खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है। देश में औसतन हर दिन इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े लगभग 25 हादसे रिपोर्ट किए जा रहे हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर में आग लगने की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब इन हादसों की गहराई से जांच कर रही हैं, क्योंकि यह न केवल संपत्ति का नुकसान है, बल्कि जानमाल के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
तीन साल का लेखा-जोखा: ईवी हादसों की बढ़ती रफ्तार
पिछले 36 महीनों के डेटा का विश्लेषण करें तो इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाओं ने ग्राफ को काफी ऊपर पहुंचा दिया है। शुरुआती दौर में जहां ये घटनाएं इक्का-दुक्का थीं, वहीं अब यह संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में बैटरी फटने और शॉर्ट सर्किट के मामले सबसे ज्यादा देखे गए हैं। कई मामलों में तो पार्किंग में खड़ी गाड़ियां अचानक आग का गोला बन गईं, जिससे आस-पास के वाहनों और इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने के चक्कर में सुरक्षा मानकों (Safety Norms) से कहीं न कहीं समझौता हुआ है।
आखिर क्यों आग पकड़ रही हैं इलेक्ट्रिक गाड़ियां?
ईवी में आग लगने के पीछे सबसे बड़ा कारण 'थर्मल रनवे' (Thermal Runway) को माना जा रहा है। लिथियम-आयन बैटरी के भीतर जब तापमान एक निश्चित सीमा से बाहर चला जाता है, तो वह अनियंत्रित होकर आग पकड़ लेती है। इसके पीछे मुख्य वजहें निम्न गुणवत्ता वाले सेल का इस्तेमाल, खराब बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), और अत्यधिक तापमान में फास्ट चार्जिंग करना है। इसके अलावा, मानसून के दौरान बैटरी पैक में पानी का रिसाव होना भी शॉर्ट सर्किट का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। भारत की सड़कों की स्थिति और अत्यधिक गर्मी इन बैटरियों के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' साबित हो रही हैं।
सुरक्षा के लिए सरकार के कड़े तेवर
बढ़ते हादसों को देखते हुए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने ईवी निर्माताओं के लिए नए सुरक्षा मानक (AIS-156) अनिवार्य कर दिए हैं। अब कंपनियों को बैटरी पैक की टेस्टिंग और उसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। जांच समितियों ने सिफारिश की है कि जो कंपनियां मानक पूरे नहीं करेंगी, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उनके बैच को वापस (Recall) मंगाया जाए। विशेषज्ञों की सलाह है कि यूजर्स को हमेशा ओरिजिनल चार्जर का उपयोग करना चाहिए और गाड़ी को सीधे धूप में चार्ज करने से बचना चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानी
इलेक्ट्रिक वाहन चलाते समय कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखकर बड़े हादसों को टाला जा सकता है। यदि चार्जिंग के दौरान बैटरी से असामान्य गंध आए या गाड़ी ज्यादा गर्म लगे, तो तुरंत चार्जिंग बंद कर दें। हमेशा विश्वसनीय ब्रांड्स से ही ईवी खरीदें जो बैटरी वारंटी और सर्विस का पुख्ता वादा करते हों। आने वाले समय में सॉलिड-स्टेट बैटरी तकनीक इन हादसों को कम करने में मददगार साबित हो सकती है, लेकिन वर्तमान में उपलब्ध तकनीक के साथ सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
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