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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी एक बार फिर भक्ति और आस्था के रंग में रंगने जा रही है। इस वर्ष भगवान श्रीकाशी विश्वनाथ अपने भक्तों को 45 घंटे तक लगातार दर्शन देंगे। 15 फरवरी की भोर से लेकर 16 फरवरी की रात्रि तक बाबा का दरबार खुला रहेगा और श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के दर्शन कर सकेंगे।

महाशिवरात्रि के दिन सुबह 2:15 बजे मंगला आरती से पर्व की शुरुआत होगी, जो 3:15 बजे तक संपन्न होगी। इसके बाद गर्भगृह की संक्षिप्त साफ-सफाई के पश्चात 3:30 बजे मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे। इसके बाद पूरे दिन और पूरी रात बाबा के झांकी दर्शन होते रहेंगे।

चारों प्रहर की आरती के बीच भी दर्शन

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र के अनुसार, महाशिवरात्रि पर परंपरा के अनुसार बाबा की शयन आरती नहीं की जाती और गर्भगृह बंद नहीं होता। इस दौरान चारों प्रहर की आरतियों के बीच भी श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलता रहेगा।

मध्याह्न भोग आरती 11:40 बजे से 12:20 बजे तक होगी।
प्रथम प्रहर की आरती रात्रि 10:00 से 12:30 बजे,
द्वितीय प्रहर 1:30 से 2:30 बजे,
तृतीय प्रहर 3:30 से 4:30 बजे और
चतुर्थ प्रहर की आरती सुबह 5:00 से 6:15 बजे तक संपन्न होगी।

विशेष सजावट और सांस्कृतिक आयोजन

महाशिवरात्रि को लेकर काशी विश्वनाथ धाम को विद्युत झालरों, रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया जा रहा है। इसके साथ ही भक्तों के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजनों की भी रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति प्राप्त हो सके।

त्र्यंबकेश्वर से आएगी विशेष हल्दी

इस बार महाशिवरात्रि पर एक विशेष परंपरा निभाई जाएगी। बाबा के अभिषेक के लिए त्र्यंबकेश्वर से लाई गई हल्दी का प्रयोग किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष केंद्र रहेगा।

देशभर से उमड़ेंगे श्रद्धालु

महाशिवरात्रि का पर्व केवल काशी ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव की आराधना करते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा और यातायात व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

15 फरवरी की भोर से 16 फरवरी की रात्रि तक बाबा विश्वनाथ के दर्शन सभी श्रद्धालुओं के लिए सुलभ रहेंगे। महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ धाम में भक्ति, परंपरा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।