Prabhat Vaibhav,Digital Desk : महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव बस कुछ ही दिनों में होने वाले हैं। लगभग एक दशक बाद 15 जनवरी को हो रहे इस चुनाव पर पूरी देश की निगाहें टिकी हैं । चुनाव से पहले एसेन्डिया द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि इस बार मुस्लिम मतदाता और महिलाएं निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
बीएमसी चुनाव: मुस्लिम मतदाता किसकी ओर झुकाव दिखा रहे हैं?
मुंबई में मुस्लिम मतदाता हमेशा से ही निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं। सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, इस बार उनका रुख कुछ इस प्रकार है:
12% मतदाता उस पार्टी को वोट देंगे जो किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देगी।
2% मतदाता: वे ऐसे उम्मीदवार को वोट देंगे जो भाजपा को हराने में सक्षम हो।
10% मतदाता: राज ठाकरे (एमएनएस) और उद्धव ठाकरे के बीच गठबंधन या समझौते का समर्थन करते हैं।
11% मतदाताओं ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में मतदान किया।
सर्वेक्षणों से पता चलता है कि इस चुनाव में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) मजबूत स्थिति में है, खासकर मराठी और अल्पसंख्यक वोटों के एकीकरण के कारण।
प्रधानमंत्री मोदी और फडणवीस के चेहरों का कितना प्रभाव है?
25 दिसंबर को किए गए इस सर्वेक्षण में मतदाताओं से पूछा गया कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चेहरों को देखकर वोट देंगे । परिणाम इस प्रकार थे:
4% मुस्लिम मतदाता
4% महिला मतदाता
2% मराठी मतदाता
ये आंकड़े बताते हैं कि इस स्थानीय सरकार के चुनाव में वार्ड पार्षदों (कॉर्पोरेटरों) का प्रदर्शन और स्थानीय मुद्दे बड़े नामों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण साबित होंगे।
भाजपा की बड़ी जीत: 44 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
चुनाव से पहले ही महायुति (भाजपा गठबंधन) ने बड़ा दांव लगाया है। शुक्रवार तक की रिपोर्टों के अनुसार, राज्य भर में महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।
इनमें से अकेले भाजपा के ही 44 उम्मीदवार हैं ।
ठाणे जिले के कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम से निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक थी ।
भाजपा नेता केशव उपाध्याय ने इसे पार्टी की बढ़ती ताकत बताया है।
विपक्ष की ओर से गंभीर आरोप: 'धमकी और पैसों का इस्तेमाल'
जहां भाजपा अपनी निर्विरोध जीत का जश्न मना रही है, वहीं विपक्ष ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ पार्टी विपक्षी उम्मीदवारों पर नामांकन वापस लेने के लिए दबाव डाल रही है।
विपक्ष का दावा है कि उम्मीदवारों को डराने-धमकाने के लिए धमकियां दी जा रही हैं और लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए धन का इस्तेमाल किया जा रहा है ।
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