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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अंतरिक्ष की दुनिया हमेशा से रहस्यों और रोमांच से भरी रही है। कल, यानी 1 अप्रैल 2026 को आसमान में एक बार फिर 'गुलाबी चंद्रमा' (Pink Moon) का दीदार होने वाला है। अक्सर लोग इसके नाम को लेकर भ्रमित हो जाते हैं और इसकी तुलना 'रक्त चंद्रमा' (Blood Moon) से करने लगते हैं। हालांकि, विज्ञान की दृष्टि से ये दोनों घटनाएं एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और ये कितने समय बाद दिखाई देते हैं।

क्या वाकई गुलाबी रंग का होता है 'पिंक मून'?

सबसे बड़ा भ्रम इसके नाम को लेकर है। 'पिंक मून' असल में गुलाबी रंग का नहीं दिखाई देता, बल्कि यह सामान्य पूर्णिमा के चंद्रमा जैसा ही सफेद और चमकदार होता है। दरअसल, यह नाम उत्तरी अमेरिका में अप्रैल के महीने में खिलने वाले एक खास जंगली फूल 'ग्राउंड फ्लॉक्स' (Ground Phlox) से प्रेरित है। चूंकि इस समय प्रकृति में चारों ओर गुलाबी फूल खिलते हैं, इसलिए पारंपरिक रूप से अप्रैल की पूर्णिमा को 'पिंक मून' कहा जाने लगा। यह पूरी तरह से एक सांस्कृतिक नामकरण है जो मौसम के बदलाव को दर्शाता है।

ब्लड मून: जब चांद ओढ़ लेता है लालिमा की चादर

गुलाबी चंद्रमा के विपरीत 'रक्त चंद्रमा' या ब्लड मून एक विशुद्ध वैज्ञानिक घटना है। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) के दौरान घटित होता है। जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बिल्कुल बीच में आ जाती है, तो वह सूर्य की सीधी रोशनी को रोक देती है। इस दौरान पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर आने वाली सूरज की लाल किरणें चंद्रमा पर पड़ती हैं, जिससे वह गहरे लाल या तांबे जैसे रंग का दिखाई देने लगता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 'रेले प्रकीर्णन' (Rayleigh Scattering) की प्रक्रिया के कारण चंद्रमा को यह विशिष्ट लाल रंग मिलता है।

कितने वर्षों में एक बार दिखती हैं ये घटनाएं?

समय के अंतराल की बात करें तो इन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है:

पिंक मून (Pink Moon): यह कोई दुर्लभ घटना नहीं है। यह हर साल अप्रैल महीने की पूर्णिमा को नियमित रूप से दिखाई देता है।

ब्लड मून (Blood Moon): यह काफी दुर्लभ होता है। औसतन यह घटना हर 1.5 से 3 साल में एक बार दिखाई देती है। हालांकि, ग्रहों की स्थिति के आधार पर कभी यह एक साल में दो बार भी दिख सकता है, तो कभी कई वर्षों तक इसका दर्शन नहीं होता।

दिखने में अंतर: फोटोग्राफर्स और स्काईवचर्स की पसंद

दिखने के मामले में पिंक मून एक सामान्य पूर्णिमा की तरह ही शांत और शीतल सफेद प्रकाश देता है। वहीं, ब्लड मून अपने चमकीले लाल रंग के कारण रात के आकाश के नजारे को पूरी तरह बदल देता है। यही वजह है कि खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए ब्लड मून का इंतजार हमेशा खास रहता है। जहां पिंक मून सिर्फ एक मौसमी परंपरा का नाम है, वहीं ब्लड मून अंतरिक्ष में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के एक दुर्लभ और सटीक संरेखण (Alignment) का परिणाम है।