Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय आकाश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की उच्च स्तरीय बैठक में रूस से S-400 वायु रक्षा प्रणाली की अतिरिक्त बैटरियों की खरीद को हरी झंडी दे दी गई है। लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी देकर भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
दुश्मन की मिसाइलें होंगी नाकाम, वायुसेना की बढ़ेगी ताकत
रूस की यह घातक S-400 प्रणाली दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों में से एक मानी जाती है। नई बैटरियों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इसके साथ ही, रक्षा मंत्रालय ने सुखोई-30 (Su-30) लड़ाकू विमानों के इंजन ओवरहाल और दूर से संचालित होने वाले 'स्ट्राइक विमानों' (Drones) की खरीद को भी मंजूरी दी है। यह स्ट्राइक विमान न केवल खुफिया जानकारी जुटाएंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में भी सक्षम होंगे।
AN-32 और IL-76 की जगह लेंगे नए परिवहन विमान
भारतीय वायुसेना के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए पुराने पड़ रहे AN-32 और IL-76 मालवाहक विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्णय लिया गया है। इनकी जगह अब नए मध्यम परिवहन विमान (Medium Transport Aircraft) शामिल किए जाएंगे। ये विमान दुर्गम इलाकों में सैनिकों और रसद को तेजी से पहुंचाने की वायुसेना की रणनीतिक और परिचालन क्षमता को नई ऊंचाई देंगे।
तटरक्षक बल को मिलेंगे 'एयर कुशन वाहन' और समुद्री शक्ति
सिर्फ आसमान ही नहीं, बल्कि समंदर की सुरक्षा को भी पुख्ता किया जा रहा है। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए भारी क्षमता वाले 'एयर कुशन वाहनों' की खरीद को मंजूरी मिली है। ये वाहन समुद्री तटों पर तीव्र गश्त, खोज एवं बचाव अभियान (Search and Rescue) और रसद पहुंचाने में गेम-चेंजर साबित होंगे। वित्तीय वर्ष 2025-26 भारत के रक्षा इतिहास में मील का पत्थर साबित हो रहा है, जिसमें अब तक के सबसे अधिक 6.73 लाख करोड़ रुपये के रक्षा समझौतों को मंजूरी दी गई है।




