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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अस्थमा एक श्वसन संबंधी समस्या है जिसमें थोड़ी सी भी लापरवाही से परेशानी बढ़ सकती है। धूल, धुआं, मौसम में बदलाव, तनाव या एलर्जी, ये सभी अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं। अधिकांश मरीज़ इनहेलर पर निर्भर रहते हैं, लेकिन कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि जीवनशैली और प्राकृतिक देखभाल से अस्थमा के लक्षणों को कम करने में कैसे मदद मिल सकती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये सुझाव इनहेलर का विकल्प नहीं हैं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में अस्थमा को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने के लिए हैं।

नाक की देखभाल:
ज़्यादातर लोग सीधे फेफड़ों पर ध्यान देते हैं, लेकिन अस्थमा में नाक ही बचाव की पहली पंक्ति होती है। हर सुबह गर्म नमक के पानी से नाक साफ करें। नाक से सांस लेने की आदत डालें, क्योंकि इससे फेफड़ों तक पहुंचने वाले एलर्जी पैदा करने वाले कणों की मात्रा कम हो जाती है। मुंह खोलकर सांस लेने से बचें।

रात का खाना जल्दी खाएं।
देर से खाना खाने या भारी भोजन करने से एसिड रिफ्लक्स बढ़ जाता है, जिससे रात में अस्थमा हो सकता है। रात के खाने और सोने के समय के बीच 2-2.5 घंटे का अंतर रखें। रात में तले हुए खाद्य पदार्थों और डेयरी उत्पादों का अधिक सेवन करने से बचें।

एयर कंडीशनर या कूलर से निकलने वाली ठंडी हवा को सीधे सांस में न लें।
ठंडी हवा सीधे सांस की नली को संकुचित कर देती है। ऐसी जगह पर न सोएं जहां ठंडी हवा सीधे आती हो, और सोते समय एयर कंडीशनर का तापमान बहुत कम न रखें।

गर्म पानी के बजाय गुनगुनी भाप लें। 
अत्यधिक गर्म भाप अक्सर हानिकारक हो सकती है। गुनगुनी भाप दिन में 3-4 बार से अधिक न लें। आवश्यकतानुसार ही लें, प्रतिदिन भाप न लें।

प्राणायाम कैसे करें?
 सुबह उठने के तुरंत बाद प्राणायाम न करें; बल्कि भोजन करने के कम से कम दो घंटे बाद इसका अभ्यास करें। पहले अपने शरीर को इसकी आदत पड़ने दें। इससे चक्कर आना और सांस फूलना जैसी समस्याएं नहीं होंगी।