Prabhat Vaibhav,Digital Desk : दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अमेरिका इस वक्त एक अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। यूक्रेन को लगातार हथियारों की सप्लाई और अब ईरान के साथ छिड़े सीधे संघर्ष ने पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) के होश उड़ा दिए हैं। स्थिति यह है कि अमेरिका के तरकश में मिसाइलों और रॉकेटों की भारी कमी होने लगी है। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी हथियार निर्माता कंपनियों को 'युद्ध स्तर' पर उत्पादन बढ़ाने का फरमान सुनाया है। ट्रंप ने मिसाइलों का उत्पादन रातों-रात चार गुना (400%) करने का कड़ा आदेश दिया है।
THAAD मिसाइलों की मचेगी धूम, दिन-रात चलेंगी फैक्ट्रियां
अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का सबसे ज्यादा जोर अपनी अत्याधुनिक 'थाड' (THAAD) मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर है। यह वही सिस्टम है जो दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही खाक कर देता है। पेंटागन ने Lockheed Martin और BAE Systems जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ तीन नए और बड़े अनुबंध (Contracts) किए हैं। आंकड़ों की बात करें तो पहले जहां लॉकहीड मार्टिन साल भर में केवल 96 'थाड' इंटरसेप्टर बनाती थी, अब उसे हर साल 400 इंटरसेप्टर तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके अलावा Honeywell Aerospace को स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई तेज करने को कहा गया है।
ट्रंप के 'शांति दावों' पर ईरान ने फेरा पानी
हथियारों की इस दौड़ के बीच राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों ने पूरी दुनिया को उलझा दिया है। एक तरफ ट्रंप मिसाइलों के भंडार भर रहे हैं, तो दूसरी तरफ वे दावा कर रहे हैं कि ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' हो गया है और वे शांति की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर अमेरिका को एक 'गुप्त उपहार' भेजा है। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह 'निराधार' बताते हुए खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते या शांति वार्ता की बात केवल कोरी कल्पना है।
दो मोर्चों पर फंसा अमेरिका: यूक्रेन और मिडिल ईस्ट का दबाव
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका एक साथ दो मोर्चों पर अपनी युद्धक सामग्री (Ammunition) खर्च कर रहा है। यूक्रेन को रूस के खिलाफ खड़ा रखने के लिए अमेरिका ने अपने शस्त्रागार का बड़ा हिस्सा खाली कर दिया है। अब ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन अब निजी कंपनियों पर दबाव बना रहा है कि वे उत्पादन की गति को उस स्तर पर ले जाएं जो आमतौर पर विश्व युद्ध के दौरान देखी जाती थी।
पेंटागन की नई रणनीति और कंपनियों के साथ डील
पेंटागन ने साफ कर दिया है कि बिना हथियारों के 'महाशक्ति' का तमगा बरकरार रखना मुश्किल है। नए समझौतों के तहत कंपनियों को अतिरिक्त फंड और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि मिसाइल इंटरसेप्टर्स की कमी को अगले कुछ महीनों में पूरा किया जा सके। ट्रंप का मानना है कि 'ताकत के जरिए शांति' (Peace through Strength) ही उनकी नीति है, लेकिन ईरान के कड़े रुख ने इस कूटनीति के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है।




