Prabhat Vaibhav,Digital Desk : इसरो का इस साल का पहला प्रक्षेपण विफल रहा। इससे पहले पिछले साल पीएसएलवी-सी62 मिशन के साथ सी61 मिशन भी असफल रहा था। इस बार रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। हालांकि, तीसरे चरण के बाद डेटा मिलने में देरी हुई। बाद में चौथे चरण को शुरू किया गया, लेकिन उसके बाद कोई अपडेट नहीं मिल रहा था। मिशन कंट्रोल सेंटर में सन्नाटा छाया हुआ था। बाद में इसरो प्रमुख ने बताया कि तीसरे चरण में कुछ खराबी आ गई थी। रॉकेट ने अपना रास्ता बदल लिया, जिसके कारण सभी उपग्रह अंतरिक्ष में खो गए। फिलहाल उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।
12 जनवरी, 2026 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) ने वर्ष का अपना पहला मिशन लॉन्च किया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:17 बजे 16 उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया। हालांकि, पीएसएलवी-सी62 रॉकेट अंतरिक्ष में अपने निर्धारित मार्ग से भटक गया। आईएसआरओ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की।
पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान
पीएसएलवी को दुनिया के सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यानों में से एक माना जाता है। इसने चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 जैसे मिशनों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह पीएसएलवी की कुल मिलाकर 64वीं उड़ान है। उपग्रहों के निर्माण और प्रक्षेपण के लिए डिज़ाइन किया गया यह भारत का 9वां वाणिज्यिक मिशन है। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए यह महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह पहली बार है कि किसी भारतीय निजी कंपनी ने पीएसएलवी मिशन में इतनी बड़ी हिस्सेदारी ली है। इस मिशन का संचालन इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) द्वारा किया जा रहा है।
सटीक निगरानी के लिए अन्वेषा उपग्रह आवश्यक है।
इस मिशन में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित अन्वेषा उपग्रह भी शामिल है। यह उन्नत इमेजिंग सुविधाओं से लैस एक खुफिया उपग्रह है, जिसे सटीक निगरानी और मानचित्रण के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अंतरिक्ष में रहते हुए भी झाड़ियों, जंगलों या बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें खींच सकता है।
भारत का पहला कक्षीय एआई इमेजिंग उपग्रह
इस मिशन में MOI-1 सबसे महत्वपूर्ण उपग्रह है। यह भारत की पहली कक्षीय AI इमेजिंग प्रयोगशाला है, जिसे हैदराबाद स्थित स्टार्टअप टेक मी टू स्पेस और ईऑन स्पेस लैब ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। MOI-1 उपग्रह एक प्रकार का 'अंतरिक्ष बादल' है, जो लोगों को सीधे उपग्रह पर प्रयोग करने की सुविधा देता है।




