Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के टूटने से पैदा हुए संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने उर्वरक, प्लास्टिक और रसायन उद्योग को बड़ी राहत देते हुए 40 से अधिक महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क (Import Duty) पूरी तरह खत्म कर दिया है। सरकार के इस फैसले से न केवल खेती-किसानी के लिए खाद सस्ती होगी, बल्कि दवाइयों और ऑटोमोबाइल सेक्टर की लागत में भी भारी कमी आने की संभावना है।
वित्त मंत्रालय का बड़ा फैसला: 40 से ज्यादा रसायनों पर ड्यूटी जीरो
भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, वैश्विक बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। सरकार ने अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल, फिनोल, पीवीसी (PVC) और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे 40 से अधिक महत्वपूर्ण कच्चे माल पर लगने वाले आयात शुल्क को हटाकर शून्य कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान-इजराइल युद्ध के कारण मालभाड़े और कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता बनी हुई है।
किसानों को बड़ी राहत: खाद की कीमतों पर लगेगा अंकुश
इस फैसले का सबसे सीधा और सकारात्मक असर भारत के कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा। उर्वरक निर्माण के लिए सबसे जरूरी कच्चा माल अमोनियम नाइट्रेट अब सस्ता मिलेगा। सरकार ने न केवल इस पर आयात शुल्क हटाया है, बल्कि 'कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर' (AIDC) को भी खत्म कर दिया है। इससे उर्वरक कंपनियों की उत्पादन लागत कम होगी, जिससे वैश्विक संकट के बावजूद देश में खाद की किल्लत नहीं होगी और कीमतें भी स्थिर बनी रहेंगी।
दवाइयों से लेकर कारों तक: हर सेक्टर को मिलेगा फायदा
पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर शुल्क हटने से केवल खेती ही नहीं, बल्कि आम आदमी से जुड़े कई अन्य उद्योग भी लाभान्वित होंगे:
दवा उद्योग (Pharma): दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों पर शुल्क हटने से जीवन रक्षक दवाएं सस्ती हो सकती हैं।
ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स: कारों के प्लास्टिक पुर्जे, सीट फोम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कोटिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत घटेगी।
पैकेजिंग और निर्माण: पीवीसी पाइप, पेंट और पैकेजिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
महंगाई पर लगाम लगाने की रणनीति
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मेथनॉल, एसिटिक एसिड और अमोनिया जैसे बुनियादी रसायनों का उपयोग लगभग हर औद्योगिक उत्पाद में होता है। सरकार के इस 'प्रो-एक्टिव' कदम से उद्योगों के लिए कच्चे माल की कमी दूर होगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। युद्ध के माहौल में जब दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है, भारत सरकार का यह फैसला घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखने के लिए एक सुरक्षा कवच (Buffer) का काम करेगा।




