Prabhat Vaibhav,Digital Desk : दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइन, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने एक ऐसा फरमान जारी किया है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में हड़कंप मच गया है। ईरान अब इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले हर तेल टैंकर से भारी-भरकम 'टोल टैक्स' वसूलने की तैयारी में है। ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद शांति की उम्मीद जगी थी, लेकिन लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने अब इस रणनीतिक मार्ग को अपनी कमाई और दबाव का जरिया बना लिया है।
क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट और सीधे हमले की धमकी
ईरान ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बिना पूर्व अनुमति के किसी भी जहाज को इस मार्ग से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत, हर जहाज को पहले ईमेल के जरिए अपने कार्गो और तेल की सटीक मात्रा की जानकारी देनी होगी। इसके बाद ईरान टोल की राशि तय करेगा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान ने यह भुगतान डॉलर या अन्य मानक मुद्राओं के बजाय क्रिप्टोकरेंसी में मांगा है। नियमों का उल्लंघन करने वाले या बिना जानकारी दिए घुसने वाले जहाजों पर ईरान ने सीधे सैन्य हमले की धमकी भी दी है।
एक जहाज से 16 करोड़ की वसूली: समझिए तेल और बैरल का गणित
ईरान की योजना के अनुसार, प्रति बैरल तेल पर 1 डॉलर का टैक्स लगाया जाएगा। सुनने में यह राशि कम लग सकती है, लेकिन एक समुद्री जहाज की क्षमता के हिसाब से यह करोड़ों में पहुंच जाती है।
VLCC (वेरी लार्ज क्रूड कैरियर): ये सबसे आम बड़े टैंकर हैं, जो लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल ले जाते हैं। यानी एक जहाज को गुजरने के लिए ईरान को 20 लाख डॉलर (करीब 16 करोड़ रुपये से अधिक) देने होंगे।
ULCC (अल्ट्रा लार्ज क्रूड कैरियर): इन जहाजों की क्षमता 40 लाख बैरल तक होती है, जिससे इनका टोल करीब 32 करोड़ रुपये से ज्यादा होगा।
Suezmax और Aframax: मध्यम और छोटे आकार के ये टैंकर भी क्रमशः 10 लाख और 7 लाख बैरल तेल ढोते हैं, जिन पर लाखों डॉलर का टैक्स लगेगा। बता दें कि एक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल होता है।
भारत की बढ़ेगी टेंशन, जेब पर पड़ेगा सीधा असर
ईरान के इस कदम का सबसे बुरा असर भारत जैसे देशों पर पड़ने की आशंका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है। प्रति बैरल एक डॉलर का अतिरिक्त बोझ भारत के तेल आयात बिल को अरबों डॉलर तक बढ़ा सकता है। इसका सीधा नतीजा घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आएगा, जिससे महंगाई का ग्राफ एक बार फिर ऊपर जा सकता है। हालांकि, ईरान ने फिलहाल खाली टैंकरों को बिना किसी टैक्स के गुजरने की छूट दी है।




