Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे दशकों पुराने तनाव को खत्म करने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक हलचल इस वक्त पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) एक हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद यह पहली बार है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच इतने उच्च स्तर की आमने-सामने की बातचीत होने जा रही है। पूरी दुनिया की नजरें इस 'शांति दूत' पर टिकी हैं, क्योंकि इनकी सफलता पर ही वैश्विक तेल बाजार और मध्य पूर्व का भविष्य निर्भर है।
ईरान की पहली पसंद क्यों बने जेडी वेंस?
हैरानी की बात यह है कि कट्टर दुश्मन होने के बावजूद ईरानी नेतृत्व के एक बड़े वर्ग ने जेडी वेंस को वार्ता के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा माना है। इसके पीछे मुख्य कारण वेंस की 'युद्ध-विरोधी' (Anti-War) छवि है। तेहरान का मानना है कि ट्रंप प्रशासन में जेडी वेंस ही एकमात्र ऐसे प्रभावशाली नेता हैं जिन्होंने शुरू से ही इस युद्ध का विरोध किया है। ईरानी विश्लेषक उन्हें एक "संतुलित और बुद्धिमान विचारक" के रूप में देखते हैं, जो सैन्य शक्ति के बजाय कूटनीतिक समाधान में विश्वास रखते हैं।
कुशनर और विटकॉफ पर अविश्वास, वेंस पर भरोसा
प्रतिनिधिमंडल में वेंस के साथ राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी शामिल हैं, लेकिन ईरान में इन दोनों को लेकर गहरा अविश्वास है। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि पिछली वार्ताओं की विफलता के लिए ये दोनों ही जिम्मेदार थे। ऐसे में जेडी वेंस की भूमिका एक 'पुल' की तरह हो गई है। जहाँ कुशनर और विटकॉफ को 'सैन्य और व्यापारिक हितों' का प्रतिनिधि माना जा रहा है, वहीं वेंस को 'शांति वार्ताकार' के रूप में देखा जा रहा है।
क्या हाथ मिलाएंगे दुश्मन? 1979 के बाद सबसे बड़ी मुलाकात
इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक में वेंस का सामना ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से होगा। कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि क्या ये कट्टर प्रतिद्वंद्वी नेता हाथ मिलाएंगे? हालांकि प्रोटोकॉल और तनाव को देखते हुए यह अनिश्चित है, लेकिन मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व में जारी दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम को एक स्थायी शांति समझौते में बदलना है।
2028 की राष्ट्रपति रेस और वैश्विक अर्थव्यवस्था
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जेडी वेंस इस असंभव से दिखने वाले मिशन में सफल हो जाते हैं, तो उनकी वैश्विक लोकप्रियता रातों-रात आसमान छू लेगी। इसे 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनके 'लॉन्चपैड' के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, इस वार्ता की सफलता से तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी, जो युद्ध के कारण मंदी के मुहाने पर खड़ी है।




