Prabhat Vaibhav,Digital Desk : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मंगलवार को पटना लौट आए, जिससे बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई। दिल्ली से इलाज के बाद उनके पटना आगमन से राजद कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखा गया है।
लालू यादव की यह वापसी ऐसे समय में आई है जब राजद और उसके नेतृत्व वाली महागठबंधन को 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों में भी लालू के समर्थक और परिवार के भीतर विवादों के बीच उनके लौटने को कई राजनीतिक विश्लेषक राजनीतिक संदेश और रणनीतिक कदम के रूप में देख रहे हैं।
राजद के कार्यकर्ता और स्थानीय नेताओं ने पटना लौटने पर लालू का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके समर्थकों का मानना है कि इससे राजद की सक्रियता और संगठनात्मक ताकत मजबूत होगी तथा आगामी राजनीतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी।
राजद सुप्रीमो की वापसी को लेकर राजनीतिक समीक्षणों में यह भी चर्चा है कि तेजस्वी यादव की सक्रिय भूमिका और पार्टी नेतृत्व की रणनीति पर यह कदम ध्यान केंद्रित करेगा। तेजस्वी पहले ही अपने यूरोप दौरे से लौट आए हैं और पार्टी की तैयारी जारी है, जिससे रुझानों में राजनीतिक समायोजन की संभावना बढ़ी है।
हालाँकि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ न्यायिक मामलों की पृष्ठभूमि भी सियासत में चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें अदालत ने हाल ही में ‘लैंड-फॉर-जॉब’ घोटाले में आरोप तय करने के आदेश दिए हैं, जिससे राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है।
पटना आगमन के साथ राजद नेतृत्व और कार्यकर्ताओं में उम्मीदों का माहौल है कि इससे पार्टी को आगामी राजनीतिक आयोजनों और कार्यशैली में मजबूती मिल सकती है।



_1814916384_100x75.jpg)
