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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का गुरुवार को 70वां जन्मदिन रहा। इस मौके पर उन्हें राजनीतिक जगत से लगातार शुभकामनाएं मिलीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए मायावती को जन्मदिन की बधाई दी।

मायावती के जन्मदिन को लेकर बसपा की ओर से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां कार्यकर्ताओं ने उन्हें दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।

योगी आदित्यनाथ ने प्रभु श्रीराम से की लंबी उम्र की कामना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट कर मायावती को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि वे प्रभु श्रीराम से मायावती के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना करते हैं।
इस मौके पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी बसपा प्रमुख को जन्मदिन की बधाई दी।

अखिलेश यादव ने संघर्ष और राजनीतिक भूमिका को किया याद

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने संदेश में मायावती के राजनीतिक संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि मायावती ने शोषित, वंचित और उपेक्षित समाज के मान-सम्मान और अधिकारों के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने उनके स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना करते हुए दोबारा जन्मदिन की बधाई दी।

40 की उम्र में बनीं मुख्यमंत्री, चार बार संभाली सत्ता

15 जनवरी 2026 को मायावती 70 वर्ष की हो गईं। उन्होंने महज 40 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। दिल्ली के एक सामान्य परिवार में जन्मीं मायावती राजनीति में आने से पहले शिक्षिका थीं। कांशीराम के मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति की शुरुआत की और जल्द ही बसपा की प्रमुख नेता बन गईं।

पहली दलित महिला मुख्यमंत्री, 2007 का कार्यकाल रहा खास

मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं और देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं। 2007 से 2012 तक उनका कार्यकाल इसलिए खास माना जाता है क्योंकि उस दौरान बसपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। दलित-ब्राह्मण सामाजिक समीकरण के जरिए उन्होंने एक नया राजनीतिक प्रयोग सफल किया।

प्रशासनिक तौर पर मायावती को सख्त फैसलों और कानून-व्यवस्था पर पकड़ रखने वाली नेता के रूप में देखा जाता है। उनके शासनकाल में कई एक्सप्रेसवे, पार्क और स्मारक बने, जिनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम के नाम पर बने स्थल प्रमुख हैं।

आज भी मायावती देश के करोड़ों दलित और वंचित वर्ग के लिए आत्मसम्मान की प्रतीक मानी जाती हैं और बसपा की सर्वोच्च नेता के रूप में उनकी भूमिका अहम बनी हुई है।