Prabhat Vaibhav,Digital Desk : तीर्थराज प्रयागराज में महाकुंभ के बाद आयोजित हो रहे माघ मेला में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है। मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर रिकॉर्ड संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद अब प्रशासन की नजरें माघ मेला के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर टिकी हैं। शासन और प्रशासन दोनों ही स्तरों पर इसे लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि संगम की पवित्र रेती पर आने वाले करोड़ों श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम तरीके से स्नान कर सकें।
मेला प्रशासन के मुताबिक, पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति पर अनुमान से कहीं अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। इसी आधार पर यह माना जा रहा है कि मौनी अमावस्या के दिन तीन से साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इसे देखते हुए पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
पहले दो स्नान पर्वों ने तोड़े अनुमान
पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व पर जहां करीब 25 लाख श्रद्धालुओं का अनुमान था, वहीं वास्तविक संख्या 31 लाख तक पहुंच गई। इसके बाद मकर संक्रांति पर 14 और 15 जनवरी को करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई गई थी, लेकिन यह आंकड़ा बढ़कर लगभग एक करोड़ 88 लाख हो गया। इन अनुभवों के बाद मौनी अमावस्या को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
18 जनवरी को है मौनी अमावस्या
मेला प्रशासन का मानना है कि मकर संक्रांति पर स्नान करने आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज में ही रुके हुए हैं। ऐसे में 18 जनवरी को पड़ने वाली मौनी अमावस्या पर भीड़ और ज्यादा बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्नान घाटों से लेकर ट्रैफिक व्यवस्था तक हर स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती
मुख्य स्नान पर्व पर सबसे बड़ी चुनौती ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने की होगी। भारी भीड़ के दबाव को देखते हुए प्रयागराज और आसपास के जिलों में 16 अस्थायी होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं, जहां जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को रोका जा सकेगा। इन होल्डिंग एरिया में सवा दो लाख से अधिक लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।
स्नान घाटों का दायरा बढ़ाया गया
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए संगम समेत सभी प्रमुख स्नान घाटों के सर्कुलेटिंग एरिया को बढ़ाया जा रहा है। पहले जहां स्नान घाटों की कुल लंबाई करीब 2.8 किलोमीटर थी, अब इसे बढ़ाकर 3.69 किलोमीटर किया जा रहा है। संगम नोज से झूंसी की ओर एरावत घाट को सबसे बड़े स्नान घाट के रूप में विकसित किया गया है।
पार्किंग, आश्रय और साफ-सफाई पर फोकस
मेला क्षेत्र और शहर में कुल 42 पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, जहां लगभग 1.30 लाख वाहन खड़े हो सकेंगे। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विभिन्न सेक्टरों में आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही करीब 26 हजार शौचालय और तीन हजार यूरिनल बनाए गए हैं। साफ-सफाई के लिए 3300 कर्मियों की तैनाती की गई है।
आधुनिक तकनीक से निगरानी
इस बार मेला क्षेत्र में एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम और क्राउड मैनेजमेंट डैशबोर्ड लागू किया गया है। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, पार्किंग स्थलों और प्रमुख चौराहों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अतिक्रमण हटाने और सड़कों को सुचारू रखने पर भी लगातार काम चल रहा है।
भोर से शाम तक रहेगा महास्नान
मौनी अमावस्या के महास्नान का शुभ मुहूर्त भोर चार बजे से शाम 5.20 बजे तक रहेगा। संगम तट पर घंटा-घड़ियाल और शंखनाद के साथ स्नान की शुरुआत होगी। प्रशासन का मानना है कि 44 दिनों तक चलने वाले माघ मेला में सबसे ज्यादा श्रद्धालु इसी दिन पहुंचेंगे।




