Prabhat Vaibhav,Digital Desk : साल 2011 में करंट लगने की भयानक दुर्घटना में रमण स्वामी अपने दोनों हाथ और एक पैर गंवा चुके थे। पानीपत जिले के सनौली खुर्द गांव के निवासी रमण महज पांच साल के थे, जब उनके घर की छत से लटकी हाई-टेंशन बिजली की तार से यह हादसा हुआ। बचपन में ही इतनी गंभीर चोटों का सामना करने वाले रमण के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने आखिरकार राहत का रास्ता साफ किया है।
हाई कोर्ट ने हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन को निर्देश दिए
कोर्ट ने हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड, पंचकूला को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह रमण को आधुनिक कृत्रिम अंग (Artificial Limbs) उपलब्ध कराने के लिए तुरंत टेंडर जारी करे और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी अदालत को दी जाए।
हादसे का विवरण और चिकित्सा इतिहास
रमण के मामले में हाई कोर्ट ने मानवता के दृष्टिकोण से कदम उठाए। अगस्त 2025 में पारित अंतरिम आदेश के तहत, हरियाणा के डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज को निर्देश दिया गया था कि एक मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए। इस बोर्ड ने रमण के इलाज के सभी विकल्पों पर विचार किया, जिसमें लिंब ट्रांसप्लांट (Limb Transplant) और आर्टिफिशियल अंग शामिल थे।
मेडिकल बोर्ड की जांच
छह अगस्त 2025 को PGI रोहतक में मेडिकल बोर्ड द्वारा रमण की विस्तृत क्लिनिकल और रेडियोलाजिकल जांच की गई। इसके आधार पर अब कोर्ट ने स्पष्ट आदेश जारी कर उपचार और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाने को कहा है।
महत्वपूर्ण संदेश
इस आदेश से यह साबित होता है कि न्यायालय गंभीर शारीरिक दुर्घटनाओं में पीड़ितों को मानवतावादी और तकनीकी सहायता मुहैया कराने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अब रमण को आधुनिक तकनीक वाले कृत्रिम अंग मिलने की उम्मीद है, जिससे उसके जीवन की गुणवत्ता में सुधार संभव होगा।




