Prabhat Vaibhav, Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ा खतरे का अलार्म बजा दिया है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की ताजा रिपोर्ट 'इंडिया 2026' ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अरब देशों में छिड़ी यह जंग लंबी खिंचती है, तो भारत में तेल और गैस की कीमतें न सिर्फ आसमान छूएंगी, बल्कि लगभग 25 लाख भारतीय परिवार गरीबी के दलदल में धंस सकते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को 299 अरब डॉलर की चपत, 88 लाख लोग संकट में
यूएनडीपी की इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पश्चिम एशिया में सैन्य खर्च बढ़ने और लगातार जारी अस्थिरता का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर लगभग 299 अरब अमेरिकी डॉलर के आर्थिक नुकसान का अनुमान है। केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में करीब 88 लाख लोग इस संकट के चलते गरीबी की रेखा के नीचे जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आर्थिक आपदा कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ा झटका साबित हो सकती है।
भारत में गरीबी दर बढ़ने का खतरा: आंकड़े दे रहे डरावना संकेत
अमर उजाला की विशेष पड़ताल के अनुसार, रिपोर्ट में भारत के लिए जो आंकड़े पेश किए गए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। अनुमान है कि देश में गरीबी की दर 23.9 प्रतिशत से बढ़कर 24.2 प्रतिशत हो सकती है। भले ही प्रतिशत में यह उछाल छोटा दिखे, लेकिन असलियत में यह 24,64,698 (करीब 25 लाख) नए लोगों को गरीबी रेखा के नीचे धकेल देगा। इसके बाद भारत में गरीबों की कुल आबादी 35.15 करोड़ से बढ़कर 35.40 करोड़ के पार पहुंच जाएगी।
क्यों है मिडिल ईस्ट पर भारत की इतनी बड़ी निर्भरता?
आम आदमी के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि सात समंदर पार होने वाली जंग का असर हमारी रसोई और जेब पर क्यों पड़ेगा? इसका जवाब भारत की ऊर्जा और कृषि जरूरतों में छिपा है:
पेट्रोल-डीजल और गैस: भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात करता है। इसमें से 40% कच्चा तेल और रसोई में इस्तेमाल होने वाली 90% एलपीजी (LPG) सीधे तौर पर पश्चिम एशियाई देशों से आती है।
किसानों पर संकट: देश के अन्नदाताओं के लिए जरूरी 45 प्रतिशत खाद (उर्वरक) का आयात भी इन्हीं युद्धग्रस्त इलाकों से होता है।
आसमान छू सकती है महंगाई, थमेगी विकास की रफ्तार
अगर सप्लाई चेन बाधित हुई तो पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बेकाबू हो जाएंगे। इससे माल ढुलाई महंगी होगी और फल-सब्जियों से लेकर हर जरूरी सामान की कीमतें बढ़ जाएंगी। यूएनडीपी ने आगाह किया है कि यह आर्थिक दबाव न केवल आम आदमी की बचत खत्म कर देगा, बल्कि देश के मानव विकास सूचकांक (HDI) को भी पीछे धकेल सकता है। सरकार के लिए आने वाले समय में राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बनने वाला है।




